मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी ने पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों का विस्तार निरन्तर जारी रहने और ग़ाज़ा पट्टी में नाज़ुक युद्धविराम के कारण व्याप्त स्थिति पर गहरी चिन्ता जताई है. उन्होंने कहा है कि इन हालात से तनाव को ईंधन मिल रहा है, फ़लस्तीनियों के लिए उनकी भूमि तक पहुँच में अवरोध पैदा हो रहे हैं और दो-राष्ट्र समाधान की आशाएँ धूमिल होती जा रही हैं.
मध्य पूर्व में हालात के मुद्दे पर सोमवार को सुरक्षा परिषद की बैठक हुई है, जिसमें सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2234 (2016) को लागू किए जाने के सिलसिले में नवीनतम जानकारी साझा की गई.
इस प्रस्ताव में, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में इसराइली बस्तियों के विस्तार पर रोक लगाने और आम नागरिकों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए तत्काल क़दम उठाने का आग्रह किया गया है.
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के कार्यवाहक विशेष समन्वयक अलकबरोव ने बताया कि महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों का विस्तार निरन्तर जारी रहने की कठोर निन्दा की है. इनके निर्माण से तनाव को ईंधन मिल रहा है, फ़लस्तीनियों के लिए उनकी अपनी भूमि तक पहुँच में अवरोध पैदा हो रहे हैं और एक भावी स्वतंत्र, सम्प्रभु फ़लस्तीन राष्ट्र के लिए ख़तरा है.
उन्होंने ई-1 इलाक़े में बस्तियों के निर्माण की योजना की निन्दा की है, जिससे पश्चिमी तट के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच सम्पर्क कटने और पूर्वी येरूशलम के शेष पश्चिमी तट से और अलग-थलग होने की आशंका है.
कार्यवाहक विशेष समन्यवक ने कहा कि 13 जून से 18 सितम्बर की अवधि में इसराइली प्रशासन ने पश्चिमी तट के ‘एरिया सी’ में 4,570 आवासीय इकाइयों को स्वीकृति दी है, जबकि पूर्वी येरूशलम में 3,515 को मज़ूरी दी गई है. यूएन के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 2,240 अतिरिक्त आवास इकाइयों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए हैं.
उन्होंने पश्चिमी तट में इसराइली सरकार द्वारा प्रशासनिक व क्षेत्रीय अधिकार नियंत्रण बढ़ाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि इन क़दमों की वजह से बस्तियों का विस्तार हो रहा है और फ़लस्तीनियों को उनकी भूमि व सम्पत्ति से वंचित किया जा रहा है.
विशेष समन्वयक ने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय स्थिति अति-गम्भीर है. इसराइली प्रशासन ने ग़ाज़ा की आबादी को 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है और सैन्य कार्रवाई में अब भी आम नागरिकों की जान जा रही है.
इसराइली सैन्य बलों द्वारा घनी आबादी वाले इलाक़ों को अब भी निशाना बनाया जा रहा है. ग़ाज़ा में स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, पिछले तीन महीनों में 360 फ़लस्तीनियों की जान गई है और बच्चों व महिलाओं समेत कम से कम 1,600 लोग घायल हुए हैं.
अक्टूबर 2025 के बाद, ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक कम से कम 1,386 फ़लस्तीनियों की जान जा चुकी है, जिनमें 300 से अधिक बच्चे और 130 महिलाएँ हैं.
विशेष समन्वयक अलकबरोव ने कहा कि प्रस्ताव 2334 के 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी ऐसी स्थिति को नैतिक, क़ानूनी व राजनैतिक रूप से सहन नहीं किया जा सकता है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने जल्द से जल्द दो-राष्ट्र समाधान के लिए फिर से प्रतिबद्धता व्यक्ति करने की अपील की है.