श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने कहा कि तीन दशकों तक जारी रहे हिंसक टकराव की वजह से जनता ने अपार पीड़ा व हानि को सहा है और उनका देश, ऐसा फिर न होने देने के लिए पूर्ण रूप से संकल्पित है.
उन्होंने सोमवार को यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि हिंसक टकराव के गहरे घाव अब भी शेष हैं और उन पर मरहम लगाने के लिए अभी बहुत किया जाना बाक़ी है.
श्रीलंकाई नेता ने बताया कि उनकी सरकार ने लम्बित मुद्दों का निपटारा करने और राष्ट्रीय एकता हासिल करने के इरादे से राष्ट्रीय संस्थाओं को मज़बूती देने के प्रयास किए हैं.
“हमने नस्लवाद और धार्मिक चरमपंथ को उसके सभी रूपों व अभिव्यक्तियों में मज़बूती से नकारा है.”
विदेश मंत्री हेराथ ने कहा कि हिन्द महासागर में स्थित द्वीपीय देश, श्रीलंका के कई नागरिक प्रवासी कामगारों के रूप में पश्चिमी एशिया क्षेत्र में कार्य करते हैं. उस क्षेत्र और अन्य स्थानों पर हिंसक टकराव की आंच श्रीलंका तक महसूस की जा रही है.
“इस घटनाक्रम का हमारी सुरक्षा, आर्थिक व सामाजिक स्थिति पर सीधे तौर पर असर पड़ता है.”
उन्होंने टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेंडा को तयशुदा समयसीमा में हासिल करने का आग्रह करते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र में सुधार लागू किए जाने होंगे ताकि कर्ज़ और विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधनों को न्यायसंगत नियमों के दायरे में मुहैया कराया जा सके.
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में टिकाऊ विकास के लिए 4 हज़ार अरब डॉलर की वित्तीय खाई को जल्द से जल्द पाटा जाना होगा. “यह समय उन संकल्पों को ठोस कार्रवाई में तब्दील करने का है.”
विदेश मंत्री हेराथ के अनुसार, श्रीलंका सरकार का ध्यान देश में निर्धनता व असमानता को दूर करने पर केन्द्रित है. 2025 के लिए राष्ट्रीय बजट में स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक धनराशि का आवंटन किया गया था.
उन्होंने कहा कि श्रीलंका, महासागरों को शान्तिपूर्ण व सतत उपयोग के लिए एक साझा संसाधन के रूप में संरक्षित करने और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है. “हमारे देश की समृद्धि, हिन्द महासागर के साथ नज़दीकी तौर पर जुड़ी हुई है.”