सूडान के विदेश मंत्री ने देश में जारी हिंसक टकराव में विदेशी हस्तक्षेप की निन्दा करते हुए कहा है कि इससे पिछले दशकों में चुनौतियों से जूझ रहे देश में संकट गहरा हुआ है.
विदेश मंत्री मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम ने सोमवार को महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल अब्देल फ़त्ताह अल-बुरहान की ओर से जनरल डिबेट को सम्बोधित किया, जोकि वर्तमान में देश की बागडोर सम्भाल रहे हैं, मगर उनके वीज़ा आवेदन को अमेरिका ने ख़ारिज कर दिया था.
विदेश मंत्री ने इन परिस्थितियों को अत्यंत खेदजनक बताया और कहा कि इससे राष्ट्रों के बीच सम्प्रभु समानता के सिद्धान्त का उल्लंघन होता है, जबकि यह संयुक्त राष्ट्र के मूल में है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में औपचारिक रूप से जानकारी एकत्र करने और 1947 के मुख्यालय समझौते को बरक़रार रखने के लिए क़दम उठाने की अपील की, जिसमें यूएन के कामकाज में शामिल होने के लिए आने वाले प्रतिनिधियो के लिए मेज़बान देश के दायित्व निर्धारित किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि देश की जनता पर थोपे गए इस युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से किए जाने वाले किसी भी ईमानदार प्रयास के लिए सूडान तैयार है. मगर हम अपने लोगों पर किसी भी समाधान, आदेश या बाहरी एजेंडे को थोपने की कोशिश को ख़ारिज करेंगे.
विदेश मंत्री ने शान्ति को एक ऐसी प्रक्रिया बताया जिसमें धैर्य, दृढ़ संकल्प और टकराव के मूल कारणों को दूर करने की प्रतिबद्धता आवश्यक है. उनके अनुसार, जिन शान्ति समझौतों में संघर्ष के अन्तर्निहित कारणों से नहीं निपटा जाता है, उनसे स्थाई शान्ति हासिल नहीं हो सकती है.
उन्होंने सूडान पर पिछले 20 वर्षों के दौरान लगाए गए अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्धों की कड़ी आलोचना की है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था व सम्प्रभुता को नुक़सान पहुँचा है, हिंसा को बढ़ावा मिला है और राष्ट्रीय मेल-मिलाप में अवरोध पैदा हुए हैं.
विदेश मंत्री ने सूडान में हथियारों, गोला-बारूद की ख़रीद-फ़रोख़्त और भाड़े के सैनिकों की आवाजाही को रोकने का आग्रह किया.
सूडानी मंत्री ने अप्रैल 2023 से देश में जारी गृहयुद्ध के लिए आतंकवादी सशस्त्र गुट को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अर्द्धसैनिक बल, त्वरित समर्थन बल (RSF) कभी सूडान की सेना की सहयोगी थी, मगर अब वर्तमान सरकार की प्रतिद्वंद्वी बन चुकी है और आम नागरिकों, चिकित्सा केन्द्रों व अस्पतालों को निशाना बनाया जा रहा है.
उन्होंने RSF को एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित न करने के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की निन्दा की और कहा कि उसके पास हथियारों, आयुध सामग्री और भाड़े के सैनिकों के प्रवाह को रोकने में दुनिया विफल रही है.
विदेश मंत्री सलीम अहमद इब्राहिम ने कहा कि सूडान में आतंकवादी मिलिशिया ने जिस तरह से क्रूरता को अंजाम दिया, उस पर चुप्पी न केवल शर्मनाक, अनैतिक और अपराध में सहभागिता है, बल्कि यह पीड़ित आम नागरिकों के साथ धोखा भी है.