इसके अलावा जस्टिस मेहता ने पूछा कि ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर यानी DPCO में आवश्यक और गैर आवश्यक दवाओं के बीच अंतर क्यों किया गया है? पीठ ने कहा कि कॉरपोरेट अस्पताल मरीजों को अकसर अपनी इन-हाउस फार्मेसी से ही दवा खरीदने के लिए कहते हैं। अदालत ने सरकारी अस्पतालों में इलाज को लेकर भी सवाल किया.
बेंच ने पूछा कि अगर मरीज का इलाज किसी सरकारी योजना के तहत हो रहा है तो इन दवाओं की महंगी कीमत का भुगतान कौन करता है? पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि 16% का एक समान मानदंड क्यों नहीं हो सकता और इसके ऊपर कुछ भी क्यों हो?