क़रीब छह वर्ष पहले, वैश्विक महामारी कोविड़-19 ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे करोड़ों लोग संक्रमण का शिकार हुए, लाखों लोगों की मौत हुई, अनेक देशों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ चरमरा गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था ठहर गई. विश्व नेता यूएन मुख्यालय में शुक्रवार को उस विशाल स्वास्थ्य चुनौती से लिए गए सबक़ की समीक्षा करने और भावी महामारी की रोकथाम व निपटने के लिए नए तौर-तरीक़ों पर चर्चा के लिए एक अहम बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि कोविड-19 को पिछले 100 वर्षों के सबसे गम्भीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में याद रखा जाना होगा.
उन्होंने गुरूवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रतिनिधियों को ध्यान दिलाया कि इस वैश्विक महामारी की वजह से 2 करोड़ लोगों की जान गई, वैश्विक अर्थव्यवस्था से 10 ट्रिलियन डॉलर स्वाहा हो गए और व्यापार व आर्थिक गतिविधियाँ पूरी तरह से ठहर गईं.
यूएन एजेंसी प्रमुख ने वैश्विक महामारी समझौते का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने एक विभाजित व दरारों से जूझ रही दुनिया के लिए ऐतिहासिक क़रार दिया. उन्होंने कहा कि इस साझा उद्देश्य के लिए देशों को साझा ज़मीन की तलाश करनी होगी.
हालांकि उन्होंने सचेत किया कि इस समझौते के ऐतिहासिक होने के बावजूद, कुछ हलकों से ये आरोप भी लगे हैं कि ये राष्ट्रीय सम्प्रभुता में हस्तक्षेप करता है, जिसका उन्होंने विरोध किया.
WHO महानिदेशक ने कहा कि सम्प्रभु देशों ने अपनी सम्प्रभुता के तहत इस समझौते पर वार्ता की, उसे पारित किया, चूँकि वे जानते हैं कि वैश्विक महामारियाँ सीमाओं का सम्मान नहीं करती हैं.
यूएन उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने यूएन प्रमुख की ओर से बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी ने हमें अनेक सबक़ सिखाए, जिनमें एक यह भी है कि हमारी आपस में जुड़ी हुई दुनिया में, कोई देश अपनी अकेले रक्षा नहीं कर सकता है.
उन्होंने कहा कि एक विशाल मानवीय व आर्थिक क़ीमत चुकाने के बाद इसे समझा गया है. “हमारा दायित्व यह है कि इस सबक़ को स्थाई तौर पर तैयारियों में तब्दील किया जाए.”
उप महासचिव ने बताया कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला के प्रकोप को फ़िलहाल एक वैश्विक महामारी घोषित नहीं किया गया है, मगर यह कार्रवाई के लिए हमारी सामूहिक तैयारी की परीक्षा ले रहा है.
उन्होंने कहा कि अक्सर इत्मीनान की भावना, ज़रूरी क़दमों का स्थान ले लेती है. “जब कोई वायरस पहली बार फैलता है, तो धन का प्रवाह होता है, वादे किए जाते हैं, लेकिन जब संक्रमणों की रफ़्तार धीरे हो जाती है, संकल्प भी कमज़ोर पड़ने लगते हैं.”
इसके मद्देनज़र, यूएन उप महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि हमें फिर कभी एक वैश्विक महामारी को हमें पंगु बनाने या विभाजित करने से रोकना होगा.