“मैं अपने बच्चों के लिए कपड़े ख़रीदना चाहता था, लेकिन नहीं ले पाया. मैं उनका दाख़िला स्कूल में कराना चाहता था, मगर यह भी मेरे बस में नहीं है.” लेबनान में चार बच्चों के एक पिता ने अपनी यह व्यथा बयाँ की है, मगर टकराव, आर्थिक मन्दी और गहरी मानवीय आवश्यकताओं से घिरे देश में हज़ारों परिवार इन्हीं वास्तविकताओं व निराशाजनक भविष्य की आशंका से जूझ रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान में हर पाँच में से चार, यानि लगभग 80 फ़ीसदी घर-परिवार अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में संघर्ष कर रहे हैं.
बच्चों के लिए भरपेट भोजन नहीं है, वे स्कूली शिक्षा से वंचित हैं और कुछ कमाने के लिए मजबूरन कामकाज करने के लिए मजबूर हो रहे हैं. लेबनान पिछले कई वर्षों से आर्थिक चुनौतियों की गिरफ़्त में है और हिंसक टकराव ने हालात को और गम्भीर बना दिया है.
लेबनान में यूनीसेफ़ के प्रतिनिधि मार्कोलुइजी कॉरसी ने बताया कि देश में बच्चों और युवाओं को जिस बोझ को उठाने के लिए कहा जा रहा है, वैसा किसी भी बच्चे को नहीं करना चाहिए.
“परिवारों को कगार तक धकेला जा रहा है, जबकि बच्चे स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा से वंचित हैं, उन्हें कामकाज की ओर धकेला जा रहा है और वे गहरे मनोसामाजिक दबाव का अनुभव कर रहे हैं.”
यूएन प्रतिनिधि ने आगाह किया कि यदि जल्द से जल्द क़दम नहीं उठाए गए, तो ये दबाव उनके जीवन को आने वाले कई वर्षों तक निर्धारित कर सकते हैं.
इस वर्ष फ़रवरी में, इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद, हिज़बुल्लाह ने इसराइल पर रॉकेट हमले किए थे, जिसके बाद इसराइली सैन्य बलों ने दक्षिणी लेबनान में हिज़बुल्लाह के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की थी.
हिंसक टकराव भड़कने के कुछ ही हफ़्तों में, 10 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए थे, जिनमें से 3.30 लाख अभी अपने घर नहीं लौट पाए हैं. 17 अप्रैल को लेबनान और इसराइल में युद्धविराम पर सहमति के बावजूद, हमले और घरों का ध्वस्तीकरण अब भी जारी है और इसराइल ने कुछ हिस्से को अपने नियंत्रण में लिया हुआ है.
हिंसक टकराव का बच्चों पर गहरा असर पड़ा. 2 मार्च 2026 के बाद, कम से कम 261 बच्चे मारे गए, एक हज़ार से अधिक घायल हुए हैं. लगभग 12 प्रतिशत बच्चे विकलांगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे हैं. सैकड़ों स्कूलों को क्षति पहुँची और बच्चे पढ़ाई से वंचित हो गए.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की टीम, लेबनान में मानवीय सहायता आवश्यकताओं को पूरा करने में जुटी है, जिसके तहत बच्चों व उनके परिवारों के लिए ज़रूरी समर्थन मुहैया कराया जा रहा है.
जनवरी 2026 के बाद से ही, घायल बच्चों के लिए उपचार व्यवस्था, आश्रय स्थलों व मेडिकल केन्द्रों के लिए ज़रूरी सामान मुहैया कराया गया है और विस्थापित परिवारों की देखभाल की जा रही है.
यूनीसेफ़ प्रतिनिधि मार्कोलुइजी कॉरसी ने कहा कि यदि निरन्तर प्रयास नहीं किए गए तो बच्चों व युवाओं की एक पूरी पीढ़ी, बालिग होने के बाद भी इन घावों को ढोने के लिए मजबूर हो सकती है.
उन्होंने कहा कि लेबनान को इस संकट से उबारने के लिए यह ज़रूरी है कि बच्चों की रक्षा की जाए और स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, संरक्षण व बेहतर भविष्य के अवसरों के उनके अधिकार को समर्थन मिले.