बुरकिना फ़ासो में आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी गुज़र-बसर के लिए खेती पर निर्भर है, मगर अनियमित वर्षा, सूखा, कमज़ोर सिंचाई और जलवायु परिवर्तन के कारण उसे चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है. इन्हीं स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, निएन्गदो गाँव में एक बाँध तैयार किया गया है, जिससे वहाँ खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविकाओं को मज़बूती मिलने की आशा है.
भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के समर्थन से और बुरकिना फ़ासो सरकार व संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के बीच एक साझेदारी के तहत वर्ष 2020 में इस परियोजना की शुरुआत की गई थी.
बुरकिना फ़ासो में यूएन विकास कार्यक्रम के प्रतिनिधि स्नेहल सोनेजी, भारत के राजदूत ओम प्रकाश मीणा और अन्य प्रतिनिधियों द्वारा मंगलवार, 27 अक्टूबर को निएन्गदो बाँध का आधिकारिक उदघाटन होने के बाद इसे आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया.
भारत-यूएन कोष के ज़रिए इस बाँध निर्माण परियोजना के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर की मदद दी गई, जबकि 3.83 लाख डॉलर बुरकिना फ़ासो सरकार और दो लाख डॉलर का योगदान यूएन विकास कार्यक्रम की ओर से किया गया.
इस बाँध के निर्माण के दौरान स्थानीय श्रमिकों को आजीविका का स्रोत मिलने के अलावा, ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित दुकानों और अन्य लघु व्यापारियों के लिए भी नए अवसर पैदा हुए.
पश्चिमी अफ़्रीका में स्थित बुरकिना फ़ासो एक भूमिबद्ध, सबसे कम विकसित देशों की श्रेणी में आता है, जहाँ 74 फ़ीसदी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है. इनमें से अधिकाँश लघु किसान हैं, जो फ़सलों के लिए बारिश के भरोसे रहते हैं.
लम्बे समय से यहाँ वर्षा रुझानों का अनुमान लगा पाना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और सूखे की वजह से यह संकट और गहरा रहा है. कृषि उत्पादन में व्यवधान आ रहा है और मवेशियों पर भी संकट है.
इस पृष्ठभूमि में, जल संसाधनों को विकसित करना और उन्हें संगठित रूप से इस्तेमाल में लाना, खाद्य सुरक्षा व निर्धनता में कमी लाने के नज़रिए से अहम है.
निएन्गदो बाँध के निर्माण के ज़रिए 5.83 लाख घन मीटर जलराशि के संरक्षण में मदद मिलने, और 10 नज़दीकी गाँवों में बसे 50 हज़ार से अधिक लोगों के लिए भरोसेमन्द जल आपूर्ति, आजीविका व खाद्य सुरक्षा में बेहतरी आने की सम्भावना है.
संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क मुख्यालय में भारत के स्थाई प्रतिनिधि, राजदूत पी. हरीश ने मंगलवार को अपने एक वीडियो सन्देश में इस बाँध के उदघाटन पर जानकारी साझा करते हुए, ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में विकास साझेदारियों के लिए भारत के संकल्प को दोहराया.
भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष, 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' की भावना के अन्तर्गत वर्ष 2017 में, 15 करोड़ डॉलर के संकल्प के साथ शुरू किया गया था, जिसके माध्यम से अफ़्रीका, एशिया, लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) में सतत विकास परियोजनाओं को समर्थन दिया जाता है.
दक्षिण-दक्षिण सहयोग से तात्पर्य, विकासशील देशों के बीच विकास साझेदारी से है, जिसमें ये देश आपसी सम्मान व लाभ के सिद्धान्त पर आधारित, साझा विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सहयोग करते हैं.
एक अनुमान के अनुसार, 'ग्लोबल साउथ' में लगभग 134 देश हैं, जहाँ विश्व की क़रीब 80 फ़ीसदी आबादी बसी हुई है.