विश्व भर में जहाँ मानव हत्या (homicide) मामलों की दर में गिरावट दर्ज की जा रही है, मगर संगठित अपराध में तेज़ी नज़र आ रही है. आपराधिक नैटवर्क, औपचारिक अर्थव्यवस्था में अपनी दख़ल दे रहे हैं और कृषि, खनन, मत्स्य पालन और वन्यजीवन से जुड़े क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रहे हैं.
संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में अपराध की रोकथाम और आपराधिक न्याय के विषय पर 15वीं यूएन काँग्रेस के दौरान जारी एक नई यूएन रिपोर्ट में बदलती दुनिया में अपराध और न्याय व्यवस्था पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.
यह रिपोर्ट 9 क्षेत्रों में हुए अध्ययन पर आधारित है, जिसके अनुसार मानव हत्या दर में कमी आई है. 2015 में यह प्रति एक लाख व्यक्ति पर 5.9 था, जोकि 2023 में घटकर 5.2 हो गया है और आगामी वर्षों में इसमें और कमी आने की सम्भावना है.
हालांकि लातिन अमेरिका, कैरीबियाई क्षेत्र और सब-सहारा अफ़्रीका में यह दर अब भी ऊँची है, जहाँ विश्व भर के कुल मानव हत्या मामलों में से लगभग दो-तिहाई दर्ज किए जाते हैं. मोटे तौर पर इसकी वजह संगठित अपराध, गैंग हिंसा और पार-अटलांटिक आपराधिक गुटों की गतिविधियाँ बताई गई हैं.
आपराधिक नैटवर्कों द्वारा औपचारिक अर्थव्यवस्था में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने, उनका हिस्सा बनने के मामले बढ़ रहे हैं.
लातिन अमेरिका में, मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त आपराधिक नैटवर्क अब कृषि, खनन, मत्स्य पालन और वन्यजीवन से जुड़े क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रहे हैं. क़ानून मामलों के लिए योरोपीय संघ की एजेंसी (Europol) के अनुसार, योरोपीय क्षेत्र में लगभग 20 फ़ीसदी आपराधिक नैटवर्क, अनेक आपराधिक बाज़ारों में अपनी गतिविधियाँ संचालित करते हैं.
कम्बोडिया, लाओस और म्याँमार में आपराधिक समूह, विशेष आर्थिक ज़ोन (special economic zone) में सक्रिय हैं, हज़ारों लोगों को मानव तस्करी का शिकार बना रहे हैं और साइबर धोखाधड़ी में लोगों को फँसा रहे हैं. इनमें रोमांस के ज़रिए धोखे से लुभाने, धन ऐंठने, क्रिप्टो धाँधली समेत अन्य तौर-तरीक़े आज़माए जा रहे हैं.
कम्बोडिया में साइबर अपराधों, अवैध जुए समेत अन्य ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में प्रति वर्ष, 12 से 19 अरब डॉलर का लेनदेन होता है, जोकि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 60 प्रतिशत है.
आपराधिक गुटों को अपनी गतिविधियों के लिए टैक्नॉलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से मदद मिल रही है और साइबर अपराधों को एक सेवा मुहैया कराने के मॉडल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है.
वर्ष 2025 में, 42 देशों में एक सर्वेक्षण कराया गया था, जिसके अनुसार दुनिया भर में 57 प्रतिशत वयस्क फ़र्जीवाड़े का शिकार हुए हैं और पिछले 12 महीनों में 23 फ़ीसदी को धन की चपत लगी है.
रिपोर्ट के अनुसार, इन परिस्थितियों में न्याय प्रणालियों पर भीषण दबाव है और अनेक देशों में इस चुनौती से निपटने के लिए क़ानून के राज व मानवाधिकार के बजाय, सुरक्षा व सरकारी नियंत्रण के नज़रिए से क़दम उठाए जा रहे हैं.
यानि सैन्यीकृत पुलिस व्यवस्था का सहारा लिया जा रहा है. पूर्वी एशिया, लातिन अमेरिका समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में आपराधिक जवाबदेही तय करने के लिए न्यूनतम आयु घटाई गई है. साथ ही, जेलों में पहले से अधिक दंडात्मक व्यवस्था स्थापित की जा रही है.
इसके अलावा, देश बहुत तेज़ी से निगरानी व एआई टैक्नॉलॉजी का सहारा ले रहे हैं, जबकि अभी उनके संचालन के लिए नियम पूरी तरह से तैयार भी नहीं हो पाए हैं.