सिएरा लियोन में विकलांगजन के लिए कौशल, आजीविका और आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार किए जाने के इरादे से एक नई परियोजना की शुरुआत हुई है. बेहतर जीवन की आशा को आर्थिक उन्नति के अवसरों तक ले जाने पर केन्द्रित यह पहल, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के समर्थन से लागू की गई है.
सिएरा लियोन के कम्बिया शहर में मगबेमा नामक 'चीफ़डम' (Chiefdom) है, जोकि स्थानीय समुदायों के लिए एक प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य करता है.
यहाँ कभी सिर्फ़ आठ घरों की एक छोटी-सी बस्ती हुआ करती थी, मगर आज यही जगह 'उम्मीद का गाँव' (Village of Hope) कहलाती है और विकलांगजन के साहस, समावेशन और बेहतर जीवन की आशाओं का प्रतीक बन चुकी है.
हाल ही में, देश के कम्बिया और केनेमा नगरों में 'पुनर्वासित कौशल प्रशिक्षण केन्द्र' की शुरुआत ने इस सफ़र में एक नया अध्याय जोड़ा है, जिनके ज़रिए यहाँ विकलागंजन को व्यावसायिक प्रशिक्षण, उद्यमिता सहायता और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएँगे ताकि वे नए कौशल सीख सकें, आय बढ़ा सकें और अधिक आत्मनिर्भर बन सकें.
ये केन्द्र, सिएरा लियोन में 'विशेष रूप से सक्षम' (Especially Abled Persons) लोगों की आर्थिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहन देने के इरादे से स्थापित किए गए हैं. भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से इस परियोजना के लिए 9.90 लाख डॉलर का वित्तीय समर्थन दिया गया है.
यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP) सिएरा लियोन के सामाजिक कल्याण मंत्रालय के साथ साझेदारी में इसे लागू करेगा, जिसका उद्देश्य कौशल विकास और आर्थिक अवसरों तक विकलांगजन की पहुँच को बढ़ाना है, ताकि वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें.
ये दोनों केन्द्र एक व्यापक पहल का पहला चरण हैं, जिसे भविष्य में सिएरा लियोन के अन्य ज़िलों तक विस्तार देने की योजना है.
सिएरा लियोन में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर सेराफ़ीन वकाना ने इन केन्द्रों के उदघाटन को विकलांगजन के अधिकारों, गरिमा और आर्थिक सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम क़दम बताया.
उन्होंने कहा कि इस पहल के ज़रिए शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक भागेदारी में व्याप्त अवरोधों को दूर करने में मदद मिलेगी और समावेशन व समान अवसरों को बढ़ावा.
UNDP के स्थानीय उप प्रतिनिधि केविन पेट्रिनी ने कहा कि ये केन्द्र केवल पुनर्वासित इमारतें नहीं हैं, बल्कि ऐसे स्थान हैं, जहाँ लोग नए कौशल सीख सकते हैं, आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं और उन अवसरों को हासिल कर सकते हैं, जो उनकी आजीविका बेहतर करने और सामुदायिक जीवन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने में मदद करें.
उन्होंने इन केन्द्रों की दीर्घकालिक सफलता के लिए सरकारी संस्थानों, विकास साझीदारों, ज़िला परिषदों और विकलांगजन के संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया है.
सिएरा लियोन की सामाजिक कल्याण मंत्री मेलरोज़ कार्मिन्टी ने इस परियोजना को विकलांगजन की गरिमा बहाल करने और नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक अहम प्रयास बताया. “विकलांगता कभी भी किसी की आकांक्षाओं की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए.”
उन्होंने सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई.
सिएरा लियोन में भारतीय उच्चायोग में कार्यवाहक प्रभारी, नीरज कुमार सैनी ने कहा कि ये केन्द्र “आशा, समावेशन और अवसर के प्रतीक” हैं. यह परियोजना दिखाती है कि मज़बूत साझेदारियाँ, वंचित समुदायों तक पहुँचने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.
दक्षिण-दक्षिण सहयोग, विकासशील देशों के बीच विकास साझेदारी को कहा जाता है, जिसमें ये देश, आपसी सम्मान व लाभ के सिद्धान्तों पर आधारित, साझा विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सहयोग करते हैं.
भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष, इसी भावना के तहत, अनेक देशों में विकास परियोजनाएँ चला रहा है. यह कोष 2017 में, 15 करोड़ डॉलर मुहैया कराने के संकल्प के साथ आरम्भ किया गया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से चलाया जा रहा है, और इसका प्रबन्धन यूएन दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय (UNOSSC) करता है.