पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है सिन्धु नदी जलक्षेत्र में भारत द्वारा पाकिस्तान के हिस्से को रोकने, उसे बाधित करने या बहाव मोड़ने के किसी भी प्रयास को युद्ध की कार्रवाई के तौर पर देखा जाएगा.
उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि सिन्धु नदी के जल की साझा हिस्सेदारी, न केवल पाकिस्तानी जनता बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी है.
पाकिस्तानी नेता के अनुसार, भारत द्वारा मौजूदा सन्धि को स्थगित रखने के एकतरफ़ा निर्णय का कोई भी क़ानूनी आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और मध्यस्थता के लिए अदालत ने भारत के इन दावों को ख़ारिज कर दिया है.
“जल को कभी भी हथियार नहीं बनाया जाना होगा. नदियों से राष्ट्र फलने-फूलने चाहिए, न कि उनमें दरार पैदा होनी चाहिए.”
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस वर्ष फ़रवरी महीने में खाड़ी क्षेत्र में भड़के हिंसक टकराव का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद में एक साथ लाने का प्रयास किया.
उन्होंने हाल के दिनों में टकराव व तनातनी में आई तेज़ी की पृष्ठभूमि में कहा कि मिसाइलों, ड्रोन, बन्दूकों की दहाड़ के बीच, कूटनीति के लिए आवाज़ को और अधिक ज़ोरदार ढंग व मज़बूती से गुंजाया जाना होगा.
उनके अनुसार, फ़ारस की खाड़ी में होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर में बाब अल-मन्देब मे जलक्षेत्र को खुला रखा जाना होगा.
प्रधानमंत्री शरीफ़ ने सऊदी अरब के विरुद्ध यमन के हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) द्वारा किए गए हमलों की निन्दा की, जिनमें पवित्र शहर मक्का पर भी ड्रोन हमले किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने एक वर्ष पहले जब भारत द्वारा आक्रामकता का सामना किया, तो यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया. प्रधानमंत्री शरीफ़ ने ‘दो परमाणु शक्ति सम्पन्न पड़ोसी देशों’ के बीच पूर्ण स्तर पर युद्ध रुकवाने का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प को दिया.
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया को फिर कभी इस कगार पर पहुँचने से रोकने के लिए कश्मीर विवाद का एक न्यायसंगत समाधान ढूंढे जाने की आवश्यकता है. उनके अनुसार, कश्मीरी जनता ने पिछले आठ दशकों से यूएन जनमत संग्रह की प्रतीक्षा की है.
“कई पीढ़ियों ने अवैध क़ब्ज़े, मनमाने ढंग से हिरासत, न्यायेतर हत्याओं, जबरन गुमशुदगी, यौन हिंसा और सामूहिक दंड को सहा है.”
उन्होंने ‘इस्लामोफ़ोबिया’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आरएसएस [राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ] द्वारा पोषित हिन्दुत्व की विचारधारा धार्मिक नफ़रत को हवा दे रही है, जिससे भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने, साम्प्रदायिक हिंसा, उपासना स्थलों पर हमलों की घटनाएँ हो रही हैं और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबन्दी हैं.
पाकिस्तानी ने ग़ाज़ा पट्टी में एक आठ वर्षीय बच्ची वफ़ा अकिलाह का ज़िक्र किया, जो अपने स्कूल के पहले दिन मारी गई थी. “क्या ग़ाज़ा में जन्मा एक बच्चा उसी जीवन, उसी भविष्य, उसी सपने का हक़दार नहीं है, जैसाकि दुनिया के अन्य हिस्सों में होता है.”
उन्होंने कहा कि पश्चिमी तट में फ़लस्तीनियों को जबरन बेदख़ल किया जाना, स्पष्टता से इसराइल के जनसंहारक एजेंडा को दर्शाता है, जोकि बेरोकटोक जारी है.
प्रधानमंत्री शरीफ़ ने कहा कि आतंकी समूह अफ़ग़ानिस्तान की शरणगाहों से पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए अपनी गतिविधियाँ चला रहे हैं. उन्होंने अफ़ग़ान प्रशासन से इस विषय में निर्णायक क़दम उठाने की अपील की है.
उन्होंने यूएन महासभा के 81वें सत्र की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि भरोसा तभी बहाल किया जा सकता है, जब बन्दूकें शान्त हों और उनके स्थान पर हाथ मिलाए जाएं, और मुस्कुराहट के साथ गले लगा जाए.
“हमने टकराव के बजाय, सम्वाद का विकल्प चुना है. हमने दबाव के स्थान पर सहयोग को चुना है. हमने युद्ध पर शान्ति का चयन किया है.”