गोल्डमैन की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 1% से भी कम है। वहीं घरेलू मार्केट में बात करें तो डिफेंस और मिलिट्री जहाजों की 75% हिस्सेदारी है, जबकि वैश्विक मार्केट में इनकी हिस्सेदारी 22% है। ऐसे में गोल्डमैन के मुताबिक घरेलू शिपबिल्डिंग सेक्टर में उठा-पटक दिखती है। सरकारी बजट और नए ऑर्डर बढ़े तो सेक्टर को सपोर्ट मिलता है तो घरेलू शिपबिल्डिंग कंपनियों की दिक्कत कुछ ही ग्राहकों पर अधिक निर्भरता है। इसके अलावा काम पूरा करने में लगने वाले लंबे समय से भी कमाई पर असर पड़ता है।