संयुक्त राष्ट्र महासभा ने क्यूबा पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक व वित्तीय प्रतिबन्धों को हटाने के लिए लगातार 34वीं बार प्रस्ताव पारित किया है. हालांकि, इस प्रस्ताव को पिछले दो दशकों में सबसे कम समर्थन मिला है. यूएन महासभा ने चिन्ता व्यक्त की है कि इतने वर्षों से हो रही अपील और प्रस्ताव के लिए समर्थन के बावजूद ये पाबन्दियाँ अब भी जारी हैं.
बुधवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 130 वोट डाले गए, जबकि 17 सदस्य देशों ने विरोध में मतदान किया. 25 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. वहीं, पिछले वर्ष इस प्रस्ताव के समर्थन में 165 वोट पड़े थे, सात ने विरोध में वोटिंग की थी और 12 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.
यह प्रस्ताव एक ऐसे समय में पारित हुआ है जब अमेरिका द्वारा ईंधन आपूर्ति की नाकेबन्दी की वजह से क्यूबा एक गम्भीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, जिससे क्यूबाई नागरिकों के लिए जीवन कठिन हो गया है.
इस वार्षिक मतदान ने अमेरिका और क्यूबा के बीच बदलते रिश्तों को परिलक्षित किया है. 1992 में जनरल असेम्बली में जब पहली बार इस प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो तीन देशों ने इसका विरोध किया था और 71 मतदान से दूर रहे.
2015 और 2017 में हुए मतदान में 191 वोट के साथ क्यूबा के लिए समर्थन चरम पर था, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में रिश्तों में जमी बर्फ़ कुछ पिघली थी. 2016 में अमेरिका ने पहली बार मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.
यह प्रस्ताव क्यूबा द्वारा पेश किया जाता है, जिसमें यूएन चार्टर के सम्प्रभु समानता, आन्तरिक मामलों में ग़ैर-हस्तक्षेप और व्यापार व आवाजाही की स्वतंत्रता सिद्धान्तों का उल्लेख है.
इस प्रस्ताव में 1996 हेल्म्स-बर्टन एक्ट का भी उल्लेख है, जिसकी वजह से अन्य देशों व क्षेत्रों में कम्पनियों व व्यक्तियों पर प्रभाव पड़ता है. साथ ही, अन्य देशों से ऐसे ही क़ानूनों को वापिस लेने की मांग की जाती है.
प्रस्ताव में बताया गया है कि 2015 और 2016 में प्रतिबन्धों में जो नरमी दिखी थी, 2017 के बाद से अपनाई गई सख़्तियों से वह बेअसर हो गई है.
अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज़ ने यूएन महासभा में चर्चा के इस आधार को ही ख़ारिज करते हुए कहा कि क्यूबा में कठिनाइयों की जड़ उसकी अपनी सरकार है.
“वहाँ कोई नाकेबन्दी नहीं है.” उन्होंने बताया कि इस वर्ष के पहले आठ महीनों के दौरान 87.6 करोड़ डॉलर के अमेरिकी निर्यात किए गए हैं, और कैनेडा, स्पेन, मैक्सिको, चीन, रूस, योरोपीय संघ और यूएन एजेंसियों की ओर से भी वहाँ खेप पहुँची हैं.
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि देश की सम्पदा ग़ायब नहीं हो गई है, लेकिन वह अब साधारण क्यूबाई नागरिकों से हटकर सत्ताधारी अभिजात्य वर्ग में आ गई है. उन्होंने संसाधनों की जमाखोरी और व्यवसाय क्षेत्र में एकाधिकारवाद के लिए सैन्य नेतृत्व को ज़िम्मेदार ठहराया.
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज़ परिला ने दर्शाया कि मंगलवार को महासभा में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होने के बाद से, इन प्रतिबन्धों की वजह से 2.29 करोड़ डॉलर का नुक़सान हो चुका है.
उन्होंने कहा कि क्यूबा में स्वास्थ्य सेवाएँ दरक रही हैं, जिसके लिए ये प्रतिबन्ध ज़िम्मेदार हैं. नवजात शिशुओं की मृत्यु दर दोगुनी हो गई है और हज़ारों की संख्या में सर्जरी में या तो देरी हो रही है या फिर उन्हें स्थगित करना पड़ रहा है.
कैंसर बीमारी के उपचार के लिए ज़रूरी दवाएँ भी वहाँ नहीं पहुँची हैं और अल्ज़ाइमर्स और मनोभ्रंश (dementia) के लिए क्यूबा द्वारा विकसित उपचार बाहर नहीं जा पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि क्यूबा की मांग बस शान्ति से रहने की है. उनका देश कोई ख़तरा नहीं है, मगर नाकेबन्दी ज़रूरी है.