संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के हवाई अड्डे पर यमन के हूथी लड़ाकों द्वारा किए गए मिसाइल हमले की निन्दा की है, जिसमें 12 लोग मारे गए हैं. उन्होंने इन हमलों को तुरन्त रोके जाने की मांग की है.
सऊदी अरब की नागरिक विमानन एजेंसी के अनुसार, शनिवार को किंग ख़ालिद अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए हमले में 309 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गम्भीर है.
यूएन प्रमुख ने अपने वक्तव्य में क्षोभ जताया है कि आम लोगों और नागरिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध किए गए ये हमले अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन हैं. “इन हमलों को तुरन्त रोका जाना होगा.”
मिसाइल हमले में मारे गए 12 लोगों में से चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी, एक अमेरिकी हैं और अन्य मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, फ़लस्तीन व सूडान से हैं. इस हमले के बाद रियाद के मुख्य एयरपोर्ट पर गतिविधियाँ रोक दी गई हैं और उड़ानों को अन्य स्थानों के लिए रवाना किया जा रहा है.
इस सप्ताह यह तीसरी बार है जब हूथी लड़ाकों ने एयरपोर्ट को निशाना बनाया है. इससे पहले, गुरूवार को हुए हमले में एक पायलट समेत तीन सऊदी नागरिक मारे गए थे. किंग ख़ालिद और अबहा हवाई अड्डों पर पूर्व में हुए हमलों में तीन लोगों की जान जाने और 36 के घायल होने की जानकारी है.
उधर यमन में, हूथी लड़ाकों का कहना है कि रविवार को राजधानी सना के हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जिसके लिए सऊदी अरब को ज़िम्मेदार ठहराया गया है. हूथी (अंसार अल्लाह गुट) का पिछले कई वर्षों से सना पर नियंत्रण रहा है.
ईरान द्वारा समर्थित हूथी लड़ाकों का वर्ष 2014 से ही सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार से हिंसक टकराव रहा है. 2022 में युद्धविराम पर हुई सहमति इस वर्ष गर्मियों तक जारी रही.
मगर, सितम्बर में हूथी लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट पर अपना दबदबा बढ़ाते हुए मोखा और बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य (strait) क्षेत्र में स्थित द्वीपों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.
इस महीने की शुरुआत में, अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार के सुरक्षा बलों ने सना और अन्य इलाक़ों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए जवाबी अभियान छेड़ा है, जिसे सऊदी अरब ने हवाई कार्रवाई के ज़रिए समर्थन दिया है.
मगर, इसके जवाब में हूथी लड़ाकों ने सऊदी अरब पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं.
लाल सागर में बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य के लिए लड़ाई, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक टकराव का एक नतीजा है.
इस वर्ष, फ़रवरी में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद, ईरान ने जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमले किए थे, और खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया था, जिससे जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित हुई थी और वैश्विक स्तर पर तेल, गैस, उर्वरक व अन्य सामान की आपूर्ति भी.
इस जलमार्ग के ज़रिए जहाज़ों की सामान्य आवाजाही अब भी बहाल नहीं हो पाई है, और इसलिए सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बाब अल-मन्दब मार्ग अहम हो गया है.
यमन के लिए विशेष दूत हैंस ग्रैंडबुर्ग ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में आगाह किया था कि देश, फिर से पूर्ण स्तर पर युद्ध की ओर लौट गया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता व आर्थिक स्थिति पर जोखिम है.