केनया में मंगलवार को पहले इबोला मामले की पुष्टि की गई है, जिससे संक्रमित एक व्यक्ति की मौत होने की ख़बर है. देश में बुंडिबुग्यो वायरस संक्रमण की दस्तक के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), केनयाई सरकार के साथ मिलकर वायरस के फैलाव को रोकने में जुट गया है.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति एक केनयाई नागरिक था और काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में रह रहा था. संक्रमण होने के बाद वहाँ कई स्वास्थ्य केन्द्रों पर उनका उपचार किया गया.
इसके बाद, 2 अक्टूबर को मरीज़ ने सड़क मार्ग से युगांडा की राजधानी कम्पाला तक की यात्रा की और फिर केनया की राजधानी नैरोबी पहुँचने के लिए विमान यात्रा की.
नैरोबी पहुँचने पर मरीज़ को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और अलग रखा गया. परीक्षण के बाद बुंडिबुग्यो वायरस की पुष्टि होने के बाद ज़रूरी उपचार मुहैया कराया गया, लेकिन 5 अक्टूबर को मरीज़ की मौत हो गई. इसके बाद, उन्हें इबोला बचाव नियमों के अनुरूप दफ़ना दिया गया.
केनया, बुंडिबुग्यो नामक वायरस की चपेट में आने वाला चौथा देश बन गया है. काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इस बीमारी का प्रकोप है, जबकि युगांडा में भी इसके मामले सामने आए हैं, वहीं, फ़्राँस में भी यात्रा सम्बन्धी एक मामला पहले दर्ज किया जा चुका है.
डीआर काँगो में, इस वर्ष मई महीने से ही बुंडिबुग्यो वायरस फैल रहा है, जोकि अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप है जहाँ संक्रमितों का आँकड़ा आठ हज़ार को पार कर चुका है. बच्चे इस बीमारी की वजह से अपने प्रियजन खो रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) का कहना है कि इबोला, उन लोगों को बच्चों से छीन रहा है, जिन पर उनका जीवन निर्भर है.
अभिभावक बीमार पड़ते हैं, एक बच्चा भी संक्रमण की चपेट में आ सकता है. इसलिए माता या पिता को उपचार के लिए ले जाया जाता है. वहाँ उनकी मौत हो सकती है. एक ऐसे समय में जब बच्चे को उनकी सख़्त ज़रूरत है, कथित कलंक और डर की वजह से रिश्तेदार और पड़ोसी दूर रहते हैं.
अब तक, 1,900 लड़के-लड़कियाँ अपने एक या दोनों अभिभावकों या फिर देखभाल करने वाले लोगों को खो चुके हैं. 29 सितम्बर तक, डीआरसी में 2,017 बच्चों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 1,062 की जान गई है.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा इतुरी और उत्तर किवु प्रान्तों में 12 नर्सरी को समर्थन दिया गया है, जहाँ इस वायरस की चपेट में आने वाले या उन नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की देखभाल की जा रही है, जिनके माता-पिता संक्रमित हैं.
“बच्चों को खिलाया-पिलाया जाता है, उनकी देखभाल की जाती है और नज़दीक से नज़र रखी जाती है, ताकि लक्षण होने पर उन्हें जल्द बाल देखभाल सेवाएँ मुहैया कराई जा सकें.”
यूनीसेफ़ ने डीआर काँगो में हर एक उपचार केन्द्र पर नर्सरी की मांग की है, और साथ ही, अति-आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखना होगा.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी, स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण मामलों की देखरेख, निगरानी में जुटी है और मृतकों को गरिमापूर्ण ढंग से दफ़नाने के अलावा, सामुदायिक स्तर पर सम्पर्क बनाए रखने की कोशिशें हो रही हैं. इसके अलावा, 54 स्वास्थ्य केन्द्रों पर 1,800 से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था की गई है.