विश्व भर में, ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जिन्हें आयु बढ़ने के साथ जीवन में असुरक्षा, भेदभाव, और पीछे छूट जाने के जोखिम का सामना करना पड़ता है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार, 1 अक्टूबर, को ‘अन्तरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ के अवसर पर ध्यान दिलाया है कि हमारे वृद्धजन समुदायों व अर्थव्यवस्थाओं में अहम भूमिका निभा रहे हैं और उनके लम्बे जीवन को बेहतर भी बनाया जाना होगा.
यूएन प्रमुख ने अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर अपने सन्देश में कहा कि यह हमारे समय की एक विशाल उपलब्धि है कि मानवता अब लम्बे समय तक जी पा रही है. यह दुनिया के अनेक हिस्सों में बेहतर स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा उपायों का संकेत है.
“इसके साथ ही, जोखिम व अवसर दोनों ही जन्म ले रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्थाओं व समाजों में कायापलट कर देने वाले बदलाव आ रहे हैं.”
दिसम्बर 1990 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित करके हर वर्ष 1 अक्टूबर को ‘अन्तरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की थी. इस वर्ष, अन्तरराष्ट्रीय दिवस की थीम, दीर्घायु होने का युग, में लम्बी आयु के लिए ज़रूरी व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार पर बल दिया गया है, ताकि बुज़ुर्ग होती दुनिया की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके.
जैसे-जैसे किसी समाज में आबादी की आयु बढ़ती है, उसके साथ ही स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं और सामाजिक समर्थन के लिए मांग में भी बढ़ोत्तरी होती है, विशेष रूप से मनोभ्रंश (dementia) जैसी अवस्थाओं के लिए जोकि वृद्धजन में निर्भरता व विकलांगता की एक बड़ी वजह है.
ऐसी स्थिति में बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विशेषीकृत देखभाल अब आवश्यक होती जा रही है.
लेकिन, वृद्धावस्था में बहुत से लोगों के लिए असुरक्षा भरे हालात में रहने और शेष दुनिया से कट जाने का जोखिम होता है. अक्सर उनके साथ भेदभाव होता है और अधिकारों व कल्याण का ध्यान नहीं रखा जाता है.
इसके मद्देनज़र, महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि रोज़गार, पेंशन, आवास व स्वास्थ्य के लिए सही नीतियों के ज़रिए, लोग अपने जीवन की शाम में भी सार्थक भागेदारी कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे बुज़ुर्ग मुखिया व देखभाल प्रदात्ता हैं, और परिवारों, समुदायों व अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. “आइए, हम अन्तर-पीढ़ीगत एकजुटता के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करें.”
“एक साथ मिलकर, हम ऐसी नीतियों को आकार दे सकते हैं, जो यह सुनिश्चित करें कि लम्बा जीवन, बेहतर भी बने और चयन, सुरक्षा व गरिमा के साथ जिया जाए.”