नेपाल में कुछ सप्ताह पहले आई भीषण बाढ़ से बड़े पैमाने पर तबाही हुई और हज़ारों लोगों का जीवन अस्तव्यस्त हो गया. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि इस आपदा का स्थानीय रोज़गारों व आजीविका अवसरों पर गहरा असर हुआ है, जिसके दुष्प्रभाव बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुए इलाक़ों से दूर तक महसूस किए जाने की आशंका है.
26 अगस्त 2026 को नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर एक ग्लेशियर के ध्वस्त हो जाने से अचानक, विशाल पैमाने पर बाढ़ आ गई थी जिसमें 1,450 से अधिक लोगों की जान गई, और पाँच हज़ार से अधिक लोग लापता हो गए. नेपाल के उत्तरी क्षेत्र में स्थित रसुवा, नुवाकोट और धादिंग क्षेत्रों में घरों, आजीविकाओं व सम्पत्तियों को नुक़सान पहुँचा.
यूएन श्रम एजेंसी का आकलन है कि बाढ़ की चपेट में आए चार किलोमीटर के इलाक़े में 21,400 लोगों के पास रोज़गार था. मगर, मकानों, कार्यस्थलों, सड़कों, स्कूलों, पुलों पावर ग्रिड और जल प्रणालियों के क्षतिग्रस्त होने, आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान आने, और कामगारों के लिए अपने रोज़गारों, बाज़ारों व अति-आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होने से चिन्ताजनक हालात हैं.
नेपाल के लिए ILO के देशीय निदेशक नुमान ओज़कान ने बताया कि इस आपदा की वजह से रोज़गारों पर होने वाले असर केवल बाढ़ प्रभावित इलाक़ों तक सीमित नहीं रहेंगे.
“परिवहन सम्पर्कों, बिजली सम्बन्धी बुनियादी ढाँचे, और व्यापार मार्गों को पहुँची क्षति के झटके, सप्लाई चेन, बाज़ारों और आपस में जुड़ी हुई अन्य सेवाओं तक पहुँच सकते हैं, जिसका दूर स्थित कामगारों व उद्यमों तक असर होगा.”
इसके मद्देनज़र, यूएन श्रम एजेंसी ने कहा है कि पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण प्रयासों के ज़रिए आजीविकाओं की रक्षा की जानी होगी और शिष्ट व उपयुक्त रोज़गार के अवसर सृजित किए जाने ज़रूरी हैं.
नेपाल में अनौपचारिक रोज़गारों का स्तर बहुत अधिक है और इस वजह से अक्सर कामगारों के पास आय व सामाजिक सुरक्षा उपाय की सीमित उपलब्धता होती है.
आर्थिक गतिविधियों में रुकावट आने की स्थिति में दिहाड़ी श्रमिकों, अस्थाई व अनौपचारिक कर्मचारियों, स्व-रोज़गार पर निर्भर लोगों, सूक्ष्म उद्यमों और घरों से ही काम करने वाले कामगारों के सामने कमाई खोने की आशंका बढ़ जाती है, भले ही रोज़गार औपचारिक तौर पर ख़त्म न हुआ हो.
यूएन एजेंसी के देशीय निदेशक के अनुसार, पुनर्बहाली के ज़रिए आजीविकाओं की रक्षा की जानी होगी, आधारभूत ढाँचे को फिर से खड़ा करना होगा, और पुनर्निर्माण प्रक्रिया के ज़रिए रोज़गार अवसरों को पैदा करने और कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता को मज़बूती देने पर ध्यान देना होगा.
प्रभावित लोगों की आय के लिए सहायता और उद्यमों को समर्थन प्रदान करने के साथ-साथ पुनर्निर्माण कार्यों में रोज़गारों को प्रधानता दी जानी होगी. कामगारों के कौशल का रोज़गार साधनों से मिलान करना होगा, कार्यस्थलों पर सुरक्षा व स्वास्थ्य सम्बन्धी उपायों, और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को सुनिश्चित करना होगा.