विश्व भर में धधकते हिंसक टकराव, युद्ध, जलवायु संकट और मानव-जनित आपदाएँ, लाखों-करोड़ों लोगों के लिए विस्थापित होने की वजह बन रही हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रमुख बरहम सालेह ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि शान्ति व्यवस्था के नाकाम होने की वजह से लोग बेघर होने के लिए मजबूर हैं.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इसी मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसमें शरणार्थी मामलों के लिए यूएन उच्चायुक्त बरहम सालेह ने 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया.
उन्होंने कहा कि 11.7 करोड़ से अधिक लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं और विस्थापन की रफ़्तार, उससे निपटने के उपायों को पीछे छोड़ रही है.
उन्होंने बताया कि सूडान, विश्व में सबसे बड़ा विस्थापन संकट है, जहाँ लाखों लोग अपने देश की सीमाओं के भीतर और अन्य देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं. काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में, पिछले कई दशकों से लोग हिंसक टकराव और विस्थापन का दंश झेल रहे हैं और इबोला वायरस के फैलाव ने उनकी व्यथा और गहरी की है.
यूक्रेन में जारी युद्ध की स्थानीय आबादी को एक विशाल मानवीय क़ीमत चुकानी पड़ी है. आम नागरिक हताहत हो रहे हैं, लाखों लोगों ने अन्य देशों में शरण ली है और परिवार एक दूसरे से अलग हो गए हैं.
उधर म्याँमार से जान बचाकर बांग्लादेश में शरण लेने वाले 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी अब भी संरक्षण जोखिमों के साए में अपने घर वापिस लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
माली और बुरकिना फ़ासो में भी, 40 लाख से अधिक लोगों ने हिंसा, असुरक्षा, जलवायु व्यवधान और खाद्य असुरक्षा के कुचक्र में फँसने की वजह से अपना घर छोड़ा है.
UNHCR प्रमुख के अनुसार, मानवीय सहायता एजेंसियाँ आम नागरिकों की रक्षा हैं और मेज़बान देशों को मदद मुहैया करा सकती हैं, लेकिन मानवतावादी शान्ति स्थापना नहीं कर सकते हैं. जब शान्ति विफल होती है तो लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर होते हैं और तब उन्हें संरक्षण की आवश्यकता होती है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों से आग्रह किया कि उन्हें अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल, हिंसक टकरावों का अन्त करने और शान्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए करना होगा.
यूएन "चार्टर में परिषद को अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए एक अनूठा दायित्व सौंपा गया है. यह ज़िम्मेदारी उन लाखों-करोड़ों शरणार्थियों, आन्तरिक रूप से विस्थापित, और राष्ट्रविहीन लोगों के लिए गहराई तक मायने रखती हैं, UNHCR जिनके लिए सेवारत है."
यूएन एजेंसी के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि युद्धविराम के लागू रहने की स्थिति में, एक परिवार अपने घर लौट सकता है. शान्ति समझौता, शरणार्थियों को अपने घर लौटने में मदद कर सकता है. बरहम सालेह ने ध्यान दिलाया कि 75 वर्ष पहले, यूएन शरणार्थी सन्धि के ज़रिए लोगों की रक्षा करने का एक वादा किया गया था, और उस वादे को निभाया जाना होगा.
"हमें विस्थापन की रोकथाम के लिए हर हास में प्रयास करने होंगे, जहाँ लोग विस्थापित हो चुके हैं, वहाँ उसका समाधान ढूंढा जाना होगा, और ऐसी परिस्थितियों को तैयार करना होगा, जहाँ लोग अपना जीवन सुरक्षा व गरिमा में जी सकें."