सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने बुधवार को यूएन महासभा में कहा कि उनका देश पुनर्बहाली के नए दौर में प्रवेश कर रहा है और विभिन्न मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने इसका श्रेय सीरियाई जनता की हिम्मत और मज़बूती को दिया.
न्यूयॉर्क में जनरल डिबेट को अपने दूसरे सम्बोधन में राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कहा कि सीरिया ने कूटनैतिक रिश्तों को मज़बूत करके दुनिया में अपनी जगह फिर बनानी शुरू कर दी है.
उन्होंने कहा, “पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा दमिश्क से जुड़ी है और उसके बिना स्थिरता सम्भव नहीं.”
राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा कि सीरिया “उत्तर से दक्षिण तक एकजुट” हुआ है. ग़ैर-सरकारी समूहों के हथियारों को सरकारी नियंत्रण में लाया गया है, सुरक्षा संस्थानों का पुनर्गठन हुआ है, प्रतिबन्ध हटाए गए हैं और पुनर्निर्माण व निवेश परियोजनाएँ शुरू की गई हैं.
उन्होंने कहा कि संक्रमणकालीन न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और लापता लोगों का पता लगाने के प्रयास भी जारी हैं.
राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा, “सीरिया में अच्छाई और बुराई के बीच लम्बे टकराव के बाद, युद्ध का बोझ उतर गया है, रक्तपात थम गया है और तबाही रुक गई है.”
उन्होंने कहा, “सीरिया ने पुनर्बहाली और पुनरुत्थान की यात्रा शुरू कर दी है और अब आत्मविश्वास के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.”
उन्होंने बताया कि सीरिया, मादक पदार्थों और मानव तस्करी समेत सीमा-पार आपराधिक नैटवर्क के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है. सुरक्षा और स्थिरता मज़बूत होने के साथ “अलगाव की दीवारें टूटने लगी हैं.”
राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा कि देश में पुनर्बहाली के साथ 35 लाख से अधिक विस्थापित लोगों और शरणार्थियों की स्वैच्छिक व सम्मानजनक वापसी हुई है.
उनके अनुसार, सीरिया अब देशों के बीच खींचतान का विषय बने संकट से निकलकर “एक ऐसे अवसर में बदल रहा है, जिसके इर्द-गिर्द राष्ट्र भलाई के लिए एकजुट हो सकते हैं.”
राष्ट्रपति अल-शारा ने कहा कि सीरिया के राष्ट्रीय सिद्धान्त “क़ानून की ताक़त और जनता की इच्छा” के साथ और मज़बूत हो रहे हैं. उन्होंने ज़ोर दिया कि गोलान “सीरियाई भूमि ही रहेगा और उसके विलय से जुड़े सभी क़दम सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 497 के तहत अमान्य हैं.”
वर्ष 1981 में सर्वसम्मति से अपनाए गए इस प्रस्ताव में इसराइल द्वारा गोलान क्षेत्र के विलय को अमान्य घोषित किया गया था.
सीरियाई राष्ट्रपति ने अपने देश में इसराइल की लगातार सैन्य घुसपैठ, “ज़मीनी हक़ीक़त बदलने की कोशिशों” और क्षेत्र में बढ़ते हमलों को ख़ारिज करते हुए कहा कि इनसे सुरक्षा और स्थिरता कमज़ोर होती है.
उन्होंने इसराइल और सीरिया के बीच 1974 के सैन्य पृथक्करण समझौते के प्रति अपने देश की प्रतिबद्धता दोहराई. इसी समझौते के तहत युद्धविराम की निगरानी के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक बल UNDOF की स्थापना हुई थी.
राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा कि “शान्ति के लिए एक ऐतिहासिक अवसर” मौजूद है – ऐसी न्यायसंगत शान्ति के लिए, जिसमें सभी के अधिकार सुरक्षित रहें.
अपने सम्बोधन के अन्त में राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा कि सीरिया में लम्बे समय तक चले हिंसक टकराव ने यह सिखाया कि “सच्चाई अपने आप में मज़बूत होती है, भले ही वह कमज़ोर दिखे, और असत्य कमज़ोर होता है, भले ही कुछ समय के लिए हावी हो जाए.”
उन्होंने कहा कि सीरिया पुनर्निर्माण की राह पर आगे बढ़ते हुए अपना गौरव और सम्मान फिर हासिल कर रहा है.
राष्ट्रपति अल-शरा ने कहा, “आज हम प्रगति और पुनर्बहाली की पुष्टि करने के लिए 81वें सत्र में खड़े हैं. 82वें सत्र में हम फिर मिलेंगे और रणनैतिक साझेदारी के नतीजों को आगे बढ़ाएँगे.”
उन्होंने कहा कि इस साझेदारी का लक्ष्य सीरिया को समृद्धि में योगदान देने वाला अन्तरराष्ट्रीय भागीदार, क्षेत्रीय स्थिरता का मॉडल और भविष्य के नए अवसरों के लिए तैयार एक जीवन्त देश बनाना है.