डिजिटल जगत में पसरी खाई को दूर करने से लेकर कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) टैक्नॉलॉजी के लाभ को हर किसी तक पहुँचाने तक. विकास के अधिकार पर घोषणापत्र की 40वीं वर्षगाँठ से पहले, विश्व नेताओं ने बुधवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा के दौरान अब तक हुई प्रगति का आकलन किया और साथ ही, 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने की तैयारी पर भी चर्चा की.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस बैठक में अधूरे रह गए वादों को पूरा करने के इरादे से कार्रवाई का एक ब्लूप्रिन्ट भी प्रस्तुत किया.
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस उच्चस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस घोषणापत्र की यह वर्षगाँठ, मनन करने के अवसर से कहीं बढ़कर है और कार्रवाई की पुकार है.
उन्होंने कहा कि विश्व भर में लाखों-करोड़ों लोगों के लिए, इस घोषणापत्र में किए गए वादे अब भी अधूरे हैं, मगर हम जानते हैं कि उन्हें किस तरह से पूरा किया जा सकता है.
यूएन प्रमुख ने टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस प्रक्रिया में किसी को भी पीछे नहीं छूटने देने का एक ब्लूप्रिन्ट है.
इस एजेंडा के तहत, १७ लक्ष्यों को स्थापित किया गया है, जोकि निर्धनता उन्मूलन, शून्य भुखमरी, जलवायु कार्रवाई, लैंगिक समानता समेत अन्य अधिकारों को साकार करने पर केन्द्रित हैं.
महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि अत्यधिक निर्धनता में गिरावट आई है और विश्व की क़रीब ५० फ़ीसदी आबादी किसी न किसी रूप में सामाजिक संरक्षा के दायरे में है. लोगों की औसत आयु बढ़ी है और वैज्ञानिक व टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में उन्नति से जीवन में बदलाव आया है और आजीविका के अवसर बढ़े हैं.
उन्होंने आगाह किया कि आज विकास लक्ष्य नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. बढ़ती असमानता, खाद्य समस्या, बढ़ता कर्ज़, हिंसक टकराव और आर्थिक अस्थिरता विकास और आर्थिक प्रगति में रुकावट डाल रहे हैं.
इनके अलावा, हर साल जलवायु संकट और भी गम्भीर होता जा रहा है. यूएन प्रमुख के अनुसार डिजिटल क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की बहुत बड़ी क्षमता है, ये नई टैक्नॉलॉजी लोगों के बीच भेदभाव और दूरी बढ़ाने का कारण भी बन सकती हैं.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि, “यह घोषणापत्र स्पष्ट रूप से विकास को एक अधिकार मानता है और विकास की प्रक्रिया में लोगों को सबसे महत्वपूर्ण स्थान देता है.”
महासचिव ने कहा कि विभाजित दुनिया में इसी सोच के साथ हम एकजुट हो सकते हैं और टिकाऊ विकास एजेंडा, ऐसा रोडमैप है जो हमें इन लक्ष्यों को साकार करने में मदद कर सकता है
“विकास, मानव अधिकार और शान्ति अलग-अलग लक्ष्य नहीं हैं. ये सभी एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ते हैं.”