2025 में, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड समेत अन्य ग्रीनहाउस गैस की मात्रा अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई है जिसके प्रभाव कई सदियों तक जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है. मौजूदा रुझान से वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी रहने और चरम मौसम घटनाओं (तूफ़ान, सूखा, बाढ़, भीषण गर्मी) का जोखिम भी बढ़ने की आशंका है.