परमाणु मामलों पर नज़र रखने वाली यूएन संस्था (IAEA) ने बताया है कि अभी उसके लिए यह पुष्टि कर पाना सम्भव नहीं है कि ईरान ने परमाणु सामग्री के अपने सुरक्षित भंडार को किसी और उद्देश्य से इस्तेमाल किया है या फिर नहीं.
अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में कहा कि अमेरिकी और इसराइली सैन्य कार्रवाई के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, परमाणु निरीक्षक अपनी पड़ताल के लिए वहाँ नहीं पहुँच पा रहे हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बदला जा सकता है और ऐसा किया जाना होगा. उनके अनुसार, ईरान के साथ अतीत में हुए प्रयास दर्शाते हैं कि सृजनात्मक सम्पर्क व बातचीत आगे बढ़ सकती है.
इसराइल और अमेरिका ने जून 2025 ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था और फिर फ़रवरी 2026 में भी बमबारी की गई. इसके बाद ही, IAEA निरीक्षकों को ईरान से सुरक्षा कारणों से वापिस बुला लिया गया था और वे वापिस परमाणु स्थलों पर नहीं लौट पाए हैं.
महानिदेशक ग्रॉस्सी ने बताया कि उनके संगठन को फ़िलहाल इन संयंत्रों की मरम्मत या फिर इनके पुनर्निर्माण का कोई संकेत नहीं मिला है. लेकिन सैटेलाइट तस्वीरें, ज़मीनी निरीक्षण का स्थान नहीं ले सकती हैं.
ईरान ने अनुरोध के बावजूद कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई है और न ही पड़ताल के लिए अनुमति दी है, जिससे IAEA द्वारा ईरान के केन्द्रों पर परमाणु सामग्री की जाँच की जा सकती. इनमें एकमात्र अपवाद, बुशहर परमाणु ऊर्जा प्लांट हैं, जहाँ निरीक्षणकर्ता अपनी पड़ताल में जुटे हैं.
उन्होंने बताया कि ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन, IAEA के साथ सम्पर्क में है ताकि बुशहर में ख़र्च हुए ईंधन के सत्यापन के लिए ज़रूरी सुरक्षित उपकरण की व्यवस्था की जा सके. फिर इस ईंधन को अगले वर्ष एक नए भंडारण केन्द्र भेजा जा सकेगा.
IAEA प्रमुख ने कहा कि ईरान ने 440 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार की घोषणा की हुई है, जिसकी स्थिति के प्रति विशेष रूप से चिन्ता है. इसके अलावा, इसफ़हान में ईंधन संवर्धन प्लांट में निरीक्षण की अनुमति भी मांगी गई है, मगर, सामान्य रूप से निरीक्षण व्यवस्था फिर से शुरू नहीं हो पाई है.
महानिदेशक ग्रॉस्सी ने कहा कि केवल कूटनीति, और यूएन परमाणु एजेंसी के सत्यापन प्रयासों के ज़रिए ही दीर्घकाल में परमाणु प्रसार की रोकथाम की जा सकती है.
यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों के बढ़ते हमलों के बीच, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने स्थानीय आबादी के लिए अन्तरराष्ट्रीय समर्थन जारी रखने की अपील जारी की है.
यूएन एजेंसी ने ध्यान दिलाया है कि कड़ाके की सर्दी से पहले मानवीय सहायता ज़रूरतें बढ़ रही हैं और रूसी हमलों में तेज़ी आ रही है, जिसकी वजह से आम लोग देश के अन्य हिस्सों में विस्थापित हो रहे हैं.
इन हमलों में यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों (बिजली, तापन व्यवस्था) को निशाना बनाया गया है, जिसकी वजह से लाखों यूक्रेनी नागरिक हीटिंग और बिजली आपूर्ति से वंचित हो गए हैं. इसके अलावा, जल व अन्य आवश्यक वस्तुओं तक भी उनकी पहुँच सीमित हो गई है.
UNHCR ने क्षोभ व्यक्त किया है कि लम्बी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों व ड्रोन हमलों के कारण यह स्पष्ट है कि देश में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है. वहीं, मानवीय सहायता अभियान भी इन हमलों की चपेट में आए हैं.
लड़ाई के अग्रिम मोर्चे से दूर इलाक़ों में भी अपनी सुरक्षा के प्रति चिन्तित हैं और अक्सर बुनियादी सेवाओं को हासिल कर पाना कठिन हो रहा है.
यूएन शरणार्थी संगठन अपने साझेदारों के साथ मिलकर ज़रूरतमन्द आबादी तक आपात सहायता व संरक्षण सेवाएँ पहुँचाने में जुटा है, जिसके तहत लोगों के लिए आश्रय, क़ानूनी सहायता, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श व नक़दी मदद की व्यवस्था की गई है.
सितम्बर से मध्य-अक्टूबर के दौरान, अनेक घटनाओं में यूएन एजेंसी के कर्मचारियों व साझेदार संगठनों पर असर हुआ है, जबकि उनके वाहनों पर स्पष्टता से राहत कार्य के बारे में जानकारी दी गई थी.
UNHCR के अनुसार, यूक्रेन में विस्थापितों की संख्या आने वाले दिनों में भी बढ़ते रहने की सम्भावना है. 52 लाख लोगों ने योरोप के कई देशों में शरणार्थी के तौर पर आश्रय लिया हुआ है.