बाढ़, सूखे या तूफ़ान की वजह से निर्धनता की चपेट में आया एक परिवार. ऑनलाइन धोखाधड़ी के कारण अपनी जमा-पूँजी गँवाने वाला एक व्यक्ति. सार्वजनिक सेवाओं के चरमराने से कठिनाइयों से जूझ रहा एक समुदाय. एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में ये ऐसे उदाहरण हैं जो बड़ी संख्या में लोगों के जीवन की वास्तविकता बन चुके हैं. यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, असुरक्षा अब केवल रणभूमि तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि घरों, कार्यस्थलों और समुदायों में प्रवेश कर चुकी है.
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि पारम्परिक सैन्य ख़तरे ही असुरक्षा की वजह नहीं हैं और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए यह ज़रूरी है कि देश, सुरक्षा की समझ के प्रति अपनी सोच में बुनियादी रूप से बदलाव लाएं.
साथ ही, संस्थाओं, टैक्नॉलॉजी, तूफ़ान, बाढ़, भीषण गर्मी जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी, और सामाजिक कल्याण उपायों में निवेश किया जाना होगा ताकि संकटों को व्यापक अस्थिरता में तब्दील होने से रोका जा सके.
इस रिपोर्ट में, ईरान से अफ़ग़ानिस्तान और प्रशान्त द्वीपीय देशों तक ध्यान केन्द्रित किया गया है, जिसके अनुसार, आपस में जुड़े हुए संकट लगातार गम्भीर हो रहे हैं, जबकि सरकारें उनकी रोकथाम के बजाय उनसे उपजने वाली आपात स्थिति से निपटने में उलझी हैं.
वर्ष 2025 में दुनिया भर में सैन्य ख़र्च लगभग 2.9 हज़ार अरब डॉलर तक पहुँच गया, जबकि आधिकारिक विकास सहायता में लगभग 23 प्रतिशत की गिरावट आई और यह घटकर 174.3 अरब डॉलर रह गई. यह अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है.
रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर जहाँ ख़तरे और उनकी आर्थिक क़ीमत बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर उनसे बचाव और समाज को मज़बूत बनाने के लिए उपलब्ध संसाधन, क्षमताएँ और व्यवस्थाएँ कमज़ोर हो रही हैं.
UNDP के प्रशासक ऐलेक्ज़ेंडर डे क्रू ने कहा कि बहुत से लोगों के लिए असुरक्षा की शुरुआत, उनके रोज़गार ख़त्म हो जाने, कोई बिल न चुका पाने, ऑनलाइन धोखाधड़ी या भरोसेमन्द सार्वजनिक सेवाओं के अभाव से होती है. उन्होंने कहा कि, “विकास ही रोकथाम है. और रोकथाम, सुरक्षा में किया जाने वाला सबसे समझदारी भरा निवेश है.”
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में ऑनलाइन धोखाधड़ी के ज़रिए लगभग 1.03 हज़ार अरब डॉलर की अवैध कमाई हुई. पिछले वर्ष केवल एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में लोगों को साइबर अपराधों की वजह से 114 अरब डॉलर तक का नुक़सान होने का अनुमान है.
इस क्षेत्र में, अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लगभग 1.3 अरब कामगारों में से अनेक के पास पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा, बचत या बीमा नहीं है. वहीं, विश्व भर में आपदाओं से प्रभावित 70 प्रतिशत लोग इसी क्षेत्र में बसे हुए हैं.
यूएन विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों को अलग-अलग देखने के बजाय, इन्हें एक दूसरे को हवा देने वाले कारणों के रूप में समझा जाना चाहिए, जिससे असुरक्षा का एक ऐसा भँवर बनता है, जिससे पारम्परिक सुरक्षा उपायों व औज़ारों से नहीं निपटा जा सकता है.
रिपोर्ट में संकटों की रोकथाम के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं, जैसेकि:
रिपोर्ट में उदाहरणों के ज़रिए बताया गया है कि ठोस स्थानीय प्रशासन, सामाजिक कल्याण व्यवस्थाओं, डिजिटल रक्षा उपायों, समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों, और सामुदायिक भरोसे के ज़रिए जोखिमों कमी और सुरक्षा को मज़बूती दी जा सकती है.
इसके आर्थिक फ़ायदे भी हैं. आपदाओं के प्रति सहनसक्षम बनाने पर ख़र्च किया गया हर डॉलर, राहत कार्यों के चार से सात डॉलर बचा सकता है. वहीं, संकटों की रोकथाम में निवेश किए गए हर एक डॉलर से, 103 डॉलर तक का लाभ हो सकता है.
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों, गहराते डिजिटल जोखिमों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, रिपोर्ट दर्शाती है कि स्थाई सुरक्षा के लिए ऐसे निवेश ज़रूरी है जिनके ज़रिए समस्याओं को संकट बनने से पहले ही रोका जाए.
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इन सिफ़ारिशों का उद्देश्य, आवश्यक प्रतिरक्षा ख़र्च का विरोध करना या विकास को सुरक्षा का साधन बनाना नहीं है.
इसके बजाय, ये अनुशन्साएँ सुरक्षा की ऐसी व्यापक सोच अपनाने पर बल देती है, जिसमें लोगों की भलाई, संकटों का सामना करने की क्षमता और संस्थाओं पर भरोसे को प्राथमिकता मिले.
यूएन विकास कार्यक्रम के अनुसार, एशिया-प्रशान्त का सुरक्षित भविष्य केवल इस बात से तय नहीं होगा कि कितने ख़तरों को रोका गया, बल्कि इससे भी कि लोग कितने सम्मान के साथ जी पा रहे हैं, उन्हें कितने अवसर मिल रहे हैं और वे अपने भविष्य को लेकर कितने आश्वस्त हैं.