संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी जारी की है कि इस वर्ष 'अल नीन्यो' जलवायु प्रभाव से अतीत के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त हो जाने की आशंका है, जिससे विश्व के अनेक हिस्सों में चरम मौसम घटनाओं (सूखा, बाढ़, भीषण गर्मी) का प्रकोप बढ़ेगा और करोड़ों लोग उससे प्रभावित हो सकते हैं. यूएन एजेंसियों ने आगाह किया है कि इससे निपटने के लिए समय रहते तैयारी और प्रभावित समुदायों के लिए सहायता की व्यवस्था की जानी ज़रूरी है.
संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय (OCHA) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार को जिनीवा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह अलर्ट जारी किया है.
WMO महासचिव सेलेस्ते साउलो ने बताया कि इस बार अल नीन्यो प्रभाव, अपने साथ अभूतपूर्व शक्ति लेकर आ सकता है. पिछले चार दशकों के दौरान इस प्रभाव की निगरानी के लिए जिन पैमानों का इस्तेमाल किया गया है, यह उनसे परे तक जा सकता है.
उन्होंने कहा कि यह 2026 के अन्तिन दिनों में अपने चरम पर होगा, लेकिन इसके प्रभाव लम्बे समय तक महसूस किए जाते रहेंगे.
‘अल नीन्यो' और ‘ला नीन्या’, पृथ्वी पर जलवायु प्रणाली के मुख्य वाहक हैं, जो समुद्र की सतह के तापमान, हवाओं, दबाव और वर्षा के रूझान में बदलाव लाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.
अल नीन्यो (El Niño) हर दो से सात वर्ष के दौरान होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशान्त महासागर क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से अधिक हो जाता है. इसके निम्न प्रभाव देखे जा सकते हैं:
WMO अपडेट के अनुसार, उष्णकटिबन्धीय प्रशान्त महासागर क्षेत्र, चरम अल नीन्यो प्रभाव का मुख्य केन्द्र है, जहाँ समुद्री सतह के तापमान में नवम्बर 2026 से जनवरी 2027 के दौरान औसत से 3.8 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया जा सकता है.
प्रशान्त महासागर में आम तौर पर समुद्री सतह के तापमान में सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि भी, अल नीन्यो के अलर्ट की वजह बन सकती है. ऐसे में, अल नीन्यो की वजह से समुद्री सतह के तापमान में 3.8 डिग्री की बढ़ोत्तरी और उसके प्रभावों की फ़िलहाल कोई मिसाल ही नहीं है.
सेलेस्ते साउलो ने कहा कि अतीत में, समुद्री सतह के तापमान में औसत से 3℃ से अधिक वृद्धि का भी दुनिया में बड़ा प्रभाव देखा गया है, लेकिन इस बार यह उससे कहीं अधिक साबित हो सकता है.
मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने आशंका जताई कि अल नीन्यो की वजह से लातिन अमेरिका, पूर्वी व दक्षिणी अफ़्रीका, एशिया व प्रशान्त क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी, सूखे और बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि सोमालिया, इथियोपिया और केनया में जल्द से जल्द धनराशि और आपात राहत की आवश्यकता है, ताकि भारी बारिश से पहले से ही सामान की व्यवस्था की जा सके.
दक्षिणी अफ़्रीका में, फ़िलहाल प्राथमिकता स्थानीय किसानों के लिए बीज मुहैया कराना और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. वहीं, मध्य अमेरिका में आजीविकाओं की रक्षा के लिए तत्काल समर्थन की दरकार है.
इस प्रभाव के कारण लगभग पाँच करोड़ लोगों के लिए, भरपेट भोजन न मिलने की स्थिति और गम्भीर हो सकती है. अफ़्रीका विकास बैंक का अनुमान है कि इस चुनौती की वजह से अफ़्रीकी देशों को 10 से 20 अरब डॉलर की क़ीमत चुकानी पड़ सकती है और सकल घरेलू उत्पाद, एक से दो फ़ीसदी तक कम हो सकता है.
यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि चरम मौसम घटनाएँ नज़र आ रही हैं और अल नीन्यो प्रभाव के गहराने के साथ उनकी संख्या बढ़ सकती है.
उन्होंने सचेत किया कि यह ज़रूरी नहीं है कि शक्तिशाली अल नीन्यो का अर्थ, मानवीय त्रासदी की वजह ही बने. “हमारे पास ज़िन्दगियों व आजीविकाओं की रक्षा करने के लिए विज्ञान, पूर्वानुमान और समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों का सहारा है.”
“अब हमें निर्णायक क़दम उठाने की आवश्यकता है, विशेष रूप से सबसे सम्वेदनशील परिस्थितियों में रह रहे समुदायों की रक्षा के लिए.”
अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने बताया कि इथियोपिया, चाड, सोमालिया, दक्षिण सूडान, अल सल्वाडोर समेत 11 देशों की मदद के लिए केन्द्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष (CERF) से पाँच करोड़ डॉलर से अधिक धनराशि जारी की गई है.
यूएन अधिकारियों ने अल नीन्यो के दीर्घकालीन प्रभाव, कई महीनों, यहाँ तक कि वर्षों तक महसूस किए जाने की आशंका जताई है. मध्य पूर्व में टकराव और यूक्रेन युद्ध की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य और काला सागर में मानवीय सहायता आपूर्ति के लिए पहले से ही चुनौतीपूर्ण स्थिति है. अब अल नीन्यो के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ सकता है.