अश्विन पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहते हैं। मान्यता है कि इस रात्रि माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है "को जाग्रति"। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है ताकि घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन हो। शरद पूर्णिमा की रात को दूध और चावल की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखने की विशेष परंपरा है। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इस खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी माना जाता है।