BondScanner के संस्थापक और सीईओ निश्चय नाथ ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा, 'बढ़ती महंगाई, आरबीआई द्वारा लिक्विडिटी में सख्ती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के कारण 10-वर्षीय भारतीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड नीतिगत घोषणा से हफ्ते भर पहले ही 7% के पार पहुंच गई थी। इसीलिए यहां से यील्ड में किसी अचानक बड़ी उछाल की उम्मीद नहीं है। जो निवेशक किसी फिक्स्ड-रेट बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी तक होल्ड करते हैं, उन्हें तय ब्याज और मूलधन पूरा मिलेगा। वहीं डेट फंड्स का मूल्यांकन रोजाना मार्केट प्राइस पर होता है, इसलिए बॉन्ड की कीमतों में गिरावट का असर फंड्स की NAV पर तुरंत दिखेगा, खासकर गिल्ट और लॉन्ग-ड्यूरेशन फंड्स में।'