उन्होंने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए कहा कि गुजरात के वडनगर में वह हमेशा क्लास में पहुंचने वाले शुरुआती छात्रों में रहते थे। सीखने की वह उत्सुकता आज भी उनके जीवन का हिस्सा है और वह खुद को आज भी एक विद्यार्थी मानते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मंदिर में उनकी एक प्रार्थना यह भी थी कि सीखने की क्षमता कभी कम न हो और वह लगातार कुछ नया सीखते रहें। प्रधानमंत्री ने अपने 25 साल के सफर को अनुभव और जनता के विश्वास की महत्वपूर्ण पूंजी बताया। उन्होंने 'सेवा ज्योति यात्रा' में शामिल लोगों के प्रति भी आभार जताया।