PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर, विक्रम कसाट ने कहा कि बाजार में आई रिकवरी यह दिखाती है कि मेटल, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर सेक्टर में चुनिंदा खरीदारी हुई है, न कि पूरे बाजार के सेंटीमेंट में कोई बड़ा सुधार आया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें (ब्रेंट क्रूड लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल) और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरकर 95.19 के स्तर पर पहुंचना, महंगाई, कंपनियों के मार्जिन और विदेशी निवेशकों के निवेश के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। हालांकि सोना और चांदी वैश्विक लेवल पर जोखिम लेने की इच्छा (रिस्क एपेटाइट) के अहम इंडीकेटर बने हुए हैं, लेकिन निवेशकों को करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव और एनर्जी की कीमतों में अस्थिरता पर भी नजर रखनी चाहिए। आगे चलकर, बाजार में आई यह तेजी कितनी टिकेगी, यह कंपनियों के तिमाही नतीजों, पश्चिम एशिया की घटनाओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर निर्भर करेगा। निवेशकों को सोच-समझकर चुनाव करना चाहिए और ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी कमाई का आउटलुक मजबूत हो, बैलेंस शीट टिकाऊ हो और वैल्यूएशन सही हो।