ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च राजीव शरण का कहना है कि सोमवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में रुपये में गिरावट आई और यह फिर से 95 के स्तर की ओर खिसकने लगा। रुपए पर बाहरी कारणो का असर फिर से दिखने लगा है। वीकेंड के दौरान स्थिति में यह बदलाव आया है कि बाजार का फोकस केंद्रीय बैंक के नियमों से हटकर पूरी तरह से तेल की कीमतों केंद्रित हो गया है। इस महीने की शुरुआत में RBI के बड़े हस्तक्षेप ने सट्टेबाजों को अपनी 'शॉर्ट पोजीशन' से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन यह ब्रेंट क्रूड के 114 अमेरिकी डॉलर के आसपास बने रहने की वास्तविकता को नहीं बदल सकता।