आयोग ने कहा, “जब कोई बीमा कंपनी यह आरोप लगाती है कि बीमा कराने वाले व्यक्ति ने स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी बातें छिपाई थीं, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसी कंपनी की होती है कि बताई गई बीमारी असल में थी और पॉलिसी लेते समय वह बीमारी अहम थी और उससे जोखिम पर असर पड़ता था। कंपनी को यह भी साबित करना होगा कि बीमा कराने वाले व्यक्ति को उस बीमारी के बारे में पता था, उसने जान-बूझकर और धोखाधड़ी से ये बातें छिपाई थीं, और बताई गई बीमारी का व्यक्ति की मौत या बीमा से जुड़े जोखिम से अहम और सीधा संबंध था।” आयोग ने आगे कहा कि LIC पेश किए गए दस्तावेज़ों के आधार पर इन बातों को साबित करने में नाकाम रही है।