ब्रोकरेज को उम्मीद है कि ड्रग पाइपलाइन का विस्तार, क्लिनिकल ट्रायल की बढ़ती गतिविधियां और नई बीमारियों के क्षेत्रों का उभरना लाइफ़ साइंसेज़ कंपनियों के लिए जटिलताएँ बढ़ाएगा। साथ ही, रेगुलेटरी और किफ़ायती होने के दबाव के कारण बजट और समय-सीमा पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे फ़ार्मास्युटिकल कंपनियाँ नॉन-कोर कामों को आउटसोर्स करने और अपने अंदरूनी संसाधनों को कोर रिसर्च और डेवलपमेंट पर केंद्रित करने के लिए प्रेरित हो रही हैं।