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कामकाज के लम्बे घंटे, रोज़गार की असुरक्षा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और डराने-धमकाने (bullying) जैसे जोखिमों से जुड़ी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण, हर साल लगभग 9 लाख लोगों की मृत्यु हो रही है. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट में ये चौंकाने वाले आँकड़े सामने आए हैं.