केनया में इबोला वायरस से संक्रमित पहले मरीज़ के सम्पर्क में आए 20 लोग, तीन सप्ताह तक अनिवार्य निगरानी और एकान्त में अलग रखे जाने (quarantine) की अवधि पूरी करने के बाद अपने परिवारों के पास वापिस लौट आए हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इन लोगों को 21 दिनों तक एकान्त में अलग रखे जाने के बाद सोमवार को छुट्टी दे दी गई, जबकि संक्रमित मरीज़ के सम्पर्क में आए अन्य 98 लोग अब भी निगरानी में हैं.
घर लौटने वाले इन लोगों में इस दौरान इबोला का कोई लक्षण नहीं दिखा. छुट्टी देने से पहले उनकी स्वास्थ्य जाँच की गई और ज़रूरी सावधानियों व आगे की देखभाल के बारे में बताया गया.
केनया के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर पैट्रिक अमोथ ने समुदायों से इन लोगों का स्वागत करने की अपील की. उन्होंने कहा कि, “21 दिनों तक इनमें कोई लक्षण नहीं दिखा है, इसलिए अब इनसे किसी को संक्रमण का ख़तरा नहीं है.”
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो प्रकार की वजह से, इस वर्ष मई महीने से ही संक्रमण फैल रहा है और संक्रमितों का आँकड़ा 10 हज़ार के पास पहुँच चुका है. डीआर काँगो के अलावा, केनया, युगांडा में भी इसके मामले सामने आए हैं, वहीं, फ़्राँस में भी यात्रा सम्बन्धी एक मामला पहले दर्ज किया जा चुका है.
इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रव्यों, जैसेकि पसीने, रक्त व लार के सम्पर्क में आने से फैलता है.
इसलिए स्वच्छता बरतना, नियमित रूप से हाथ धोना, सैनेटाइज़र्स का इस्तेमाल करना आवश्यक है, और अन्य लोगों से हाथ मिलाने बचना, संक्रमण होने की स्थिति में लक्षणों की पहचान होनी और तुरन्त मेडिकल देखभाल तक पहुँचना ज़रूरी है.
केनया में 6 अक्टूबर को इबोला संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि हुई थी. संक्रमित व्यक्ति केनया का नागरिक था और काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में रहकर काम कर रहा था. वह 3 अक्टूबर को युगांडा के रास्ते केनया लौटा और दो दिन बाद नैरोबी के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई.
इसके बाद स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उसके सम्पर्क में आए लोगों की तलाश शुरू की. इनमें परिवार के सदस्य, विमान के यात्री और चालक दल, हवाई अड्डे के कर्मचारी व स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे.22 अक्टूबर तक केनया और विदेशों में ऐसे सभी लोगों की पहचान करके उन्हें क्वारंटीन में रखा गया था.
अब तक इनमें से आठ लोगों में बीमारी के लक्षण मिले और जाँच में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई. उन्हें तुरन्त नैरोबी के इबोला उपचार केन्द्र में भर्ती कराया गया.
केनया में अब तक इबोला संक्रमण के नौ मामलों व दो मौतों की पुष्टि हुई है. सभी मामले आपस में जुड़े हैं और समुदाय में संक्रमण फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है.
बुंडिबुग्यो वायरस से होने वाली बीमारी के लिए फ़िलहाल कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है. हालाँकि, WHO के अनुसार, संक्रमण का जल्द पता लगने और सही देखभाल मिलने से मरीज़ के स्वस्थ होने की सम्भावना बढ़ जाती है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी इस संक्रमण के फैलाव पर नज़र रखने, मरीज़ों की पहचान एवं उपचार, प्रयोगशाला में परीक्षण, सीमा पर स्वास्थ्य जाँच और लोगों को जागरूक करने में केनया को मदद मुहैया करा रही है.