क़ाबिज़ पश्चिमी तट के हेब्रॉन शहर में बीते शुक्रवार से इसराइल ने आक्रामक कार्रवाई शुरू की है, जिसकी वजह से अब तक दो हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी जबरन विस्थापन का शिकार हुए हैं, घरों व कमर्शियल सम्पत्तियों को ध्वस्त किया गया है और आम फ़लस्तीनी स्वतंत्र आवाजाही से वंचित हो गए हैं. यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि पूरे इलाक़ों को मिटा देने की धमकियों से ‘जातीय सफ़ाए’ की चिन्ताएँ उभर रही हैं.
हेब्रॉन के नज़दीक स्थित एक इसराइली सैन्य चौकी पर शुक्रवार को दो फ़लस्तीनी बन्दूकधारियों ने गोलीबारी की थी, जिसमें दो इसराइली सैनिक मारे गए थे और तीन अन्य घायल हुए थे. दोनों बन्दूकधारियों को भी मार दिया गया था.
इसके बाद, इसराइल ने अपनी कार्रवाई शुरू की है, जिसमें अब तक हज़ारों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
मानवाधिकार कार्यालय उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सोमवार को जारी अपने वक्तव्य में कहा कि इसराइली सख़्तियों से अनेक लोग अपने घरों और इलाक़ों तक सीमित हो कर रह गए हैं.
“वरिष्ठ इसराइली सरकारी अधिकारियों की घोषणाएँ दिखाती हैं कि जिन क़दमों को लागू किया गया है, वे दंडात्मक हैं और भय पैदा करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं. यह अस्वीकार्य है.”
उन्होंने सभी विस्थापितों को घर वापिस आने की अनुमति दिए जाने का आग्रह किया है. साथ ही, अवैध बेदख़ली और ध्वस्तीकरण की घटनाओं में उचित मुआवज़ा भी सुनिश्चित किए जाने की मांग की है.
“सामूहिक दंड, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का एक गम्भीर उल्लंघन है. पूरे इलाक़ों को खाली करने व मिटा देने की धमकियों से जातीय सफ़ाए के प्रति गम्भीर चिन्ताएँ उपजी हैं.”
यूएन मानवतावादी कार्यालय, पश्चिमी तट और ग़ाज़ा पट्टी में विस्थापन के नए मामलों के बाद राहत प्रयासों में जुटा है. पश्चिमी तट के विभिन्न हिस्सों में बीते सप्ताहांत, इसराइली बस्तियों के निवासियों के हमले जारी रहे जिससे ज़ैतून की पैदावार पर असर हुआ है.
इस वर्ष की शुरुआत से अब तक, इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा किए गए दो हज़ार से अधिक हमलों की जानकारी जुटाई जा चुकी है, जोकि अतीत के किसी वर्ष की तुलना में सबसे अधिक है.
वहीं, ग़ाजा में मानवीय सहायता साझेदार संगठनों ने आगाह किया है कि तथाकथित “यैलो लाइन” के इर्दगिर्द फ़लस्तीनी परिवार, लगातार आगज़नी व हमलों का सामना कर रहे हैं.
इन घटनाओं में कुछ टैंट को आग के हवाले कर दिया गया, यूएन स्कूलों और एक यूएन क़ाफ़िले के आसपास गोलीबारी की घटनाएँ हुई है. शिविरों में आग लगने की घटनाओं की वजह से बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित हुए हैं.
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने अपनी एक नई रिपोर्ट में बताया है कि इसराइल ने फ़लस्तीनियों के विरुद्ध युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों को अंजाम दिया है और ग़ाज़ा पट्टी में अब भी ऐसी घटनाएँ हो रही हैं.
मानवता के विरुद्ध अपराधों में जनसंहार, उत्पीड़न, यातना, बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा को अंजाम दिए जाने समेत अन्य मामले शामिल किए जाते हैं. पूर्व येरूशलम समेत क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े और इसराइल के लिए गठित स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट यूएन महासभा में पेश की है.
यूएन मानवाधिकार परिषद ने 2021 में इस कमीशन को स्थापित किया गया था, जिसके सदस्य स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ हैं. वे यूएन कर्मचारी नहीं हैं और न ही उन्हें अपने कार्य के लिए वेतन मिलता है.
आयोग के प्रमुख श्रीनिवासन मुरलीधर ने बताया कि फ़लस्तीनी नागरिकों की इरादतन हत्याएँ की गई, पश्चिमी तट में उनके घरों को ध्वस्त किया गया. साथ ही, इसराइल ने व्यापक रणनीति के तौर पर इसकी ज़िम्मेदारी को नकार दिया जबकि फ़लस्तीनियों के सफ़ाए और विस्थापित करने के लिए क़दम उठाए गए, और उनके जीवन को असहनीय बना दिया गया.
उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा में इसराइल ने क्षेत्र पर अपने नियंत्रण का विस्तार किया है, जिसके परिणामस्वरूप फ़लस्तीनी नागरिक हताहत हो रहे हैं. तथाकथित युद्धविराम समझौते के बावजूद बल प्रयोग और जनसंहारक कृत्यों को अंजाम दिया जा रहा है, जिसके पीछे मंशा, फ़लस्तीनी आबादी को ध्वस्त कर देने की है.
इसराइल ने रिपोर्ट के इन निष्कर्षों को ख़ारिज कर दिया है. जिनीवा में उसके स्थाई मिशन ने कहा कि यह रिपोर्ट इसराइल को बदनाम करने और उसके अस्तित्व को ही आपराधिक ठहराए जाने के मक़सद से चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान का ही एक और रूप है.