संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में आगाह किया है कि जिस तरह की आक्रामक बयानबाज़ी और धमकियाँ देखी जा रही हैं, यदि वे फिर वास्तविक टकराव में तब्दील हुईं तो क्षेत्र में हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं. इसके मद्देनज़र, उन्होंने अधिकतम संयम बरतने और युद्ध के अन्त के लिए कूटनीतिक समाधान का सहारा लेने पर बल दिया है.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी का कार्यकाल इस वर्ष के अन्त में समाप्त हो रहा है. वर्ष 2017 में अपना पदभार सम्भालने के बाद मिस्र की यह उनकी 9वीं यात्रा थी, और इस दौरान उन्होंने सोमवार को राजधानी काहिरा में पत्रकारों को सम्बोधित किया..
उन्होंने सभी पक्षों से आग्रह किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य और बाब अल-मन्दब स्ट्रेट में जहाज़ों की आवाजाही की स्वतंत्रता और अधिकारों को पूरी तरह से बहाल किया जाना होगा.
वैश्विक व्यापार और तेल, गैस, उर्वरक समेत अन्य सामान की आपूर्ति के लिए ये जलक्षेत्र बहुत अहम हैं, लेकिन इस वर्ष फ़रवरी में भड़के हिंसक टकराव के बाद से यहाँ तनाव व असुरक्षा व्याप्त है और जहाज़ों का परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
“मैं सभी पक्षों को पुरज़ोर और स्पष्ट सन्देश देना चाहता हूँ: हमें अधिकतम संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता है.”
महासचिव गुटेरेश ने दोनों पक्षों के बीच सम्वाद का माहौल तैयार करने में मध्यस्थकार के रूप में मिस्र की भूमिका की सराहना की.
उन्होंने सोमवार को पत्रकार वार्ता से पहले मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअट्टी के साथ मुलाक़ात की, जिसमें मध्य पूर्व और अफ़्रीकी क्षेत्र में सुलगते संकटों पर विचार-विमर्श हुआ.
यूएन प्रमुख ने मिस्र को बहुपक्षवाद का एक स्तम्भ बताया. “और एक ऐसे समय में जब दरारें गहरा रही हैं, यह अति-महत्वपूर्ण है कि कूटनीति के माध्यम को खुला रखा जाए.”
उन्होंने ग़ाज़ा पट्टी में भड़के टकराव का समाधान ढूंढने और मानवीय सहायता अभियान में योगदान के लिए मिस्र की भूमिका की प्रशंसा की. साथ ही, मिस्र में रैड क्रेसेन्ट जैसे साझेदार संगठनों के जीवनरक्षक प्रयासों के लिए समर्थन के प्रति आभार प्रकट किया, जिसके तहत ज़रूरतमन्दों को राहत मुहैया कराने के अलावा बेहतर उपचार के लिए मरीज़ों को बाहर निकाला जाता है.
यूएन महासचिव ने इसराइल द्वारा मानवीय सहायता पर थोपी गई पाबन्दियों को वापिस लेने की अपील करते हुए, उन अवरोधों को दूर करने की मांग की है, जिनकी वजह से ग़ाज़ा में टकराव के अन्त पर केन्द्रित योजना को लागू करने में समस्याएँ सामने आ रही हैं. इस योजना को सुरक्षा परिषद ने स्वीकृति दी हुई है.
यूएन प्रमुख ने क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइल द्वारा उठाए गए क़दमों पर गहरी चिन्ता जताई है: इसराइली बस्तियों का विस्तार, फ़लस्तीनी आबादी की निरन्तर बेदख़ली, हिंसक घटनाओं में वृद्धि, और पत्रकारों व राजनयिकों पर हमले.
“हम लगातार एक ऐसे माहौल को उभरते हुए देख रहे हैं, जिसके साथ जातीय सफ़ाए की आशंका प्रबल होती जा रही है. इसे रोका जाना होगा.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि फ़लस्तीनी आबादी के स्व-निर्धारण के जायज़ अधिकारों को साकार किए बिना, मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थाई शान्ति को हासिल नहीं किया जा सकता है.
महासचिव ने सूडान में युद्धरत पक्षों के बीच लड़ाई रोकने का आग्रह करते हुए कहा कि देश का भविष्य, एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के ज़रिए सूडान की जनता के हाथों में होना चाहिए. सूडान की एकता, सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को ध्यान में रखते हुए.
वहीं, लीबिया में भी राजनैतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने, संस्थाओं को एकजुट बनाने और राष्ट्रीय चुनाव का रास्ता तैयार करने का समय है, ताकि लम्बे समय से जारी संक्रमणकालीन प्रक्रिया का समापन किया ज सके.