विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण स्थानों पर, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक युद्धरत पक्षों के बीच तनाव में कमी में लाने, मानवीय सहायता की आपूर्ति और आम नागरिकों की रक्षा के लिए सेवारत हैं, और विशाल उम्मीदों और गौरव का स्रोत हैं. यूएन के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने इंडोनेशिया की अपनी यात्रा के दौरान शान्तिरक्षकों को श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए यह बात कही है.
यूएन शान्तिरक्षा मिशन में योगदान देने वाले देशों में इंडोनेशिया छठे स्थान पर है, और लगभग दो हज़ार वर्दीधारी महिला व पुरुष शान्तिरक्षक, सात शान्तिरक्षा अभियानों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं.
यूएन प्रमुख ने हाल ही में लेबनान में यूएन मिशन (UNIFIL) में तैनाती के दौरान अपने प्राणों का बलिदान करने वाले चार इंडोनेशियाई शान्तिरक्षकों को श्रृद्धांजलि दी.
उन्होंने सेन्तुल में इंडोनेशिया सशस्त्र बल शान्तिरक्षा केन्द्र पर अपने सम्बोधन में कहा कि दुनिया में शान्ति के लिए यह परीक्षा की घड़ी है, और शान्तिरक्षक अत्यंत कठिन परिस्थितियों में आम नागरिकों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर रहे हैं.
उन्होंने मृतक शान्तिरक्षकों के परिजन के प्रति अपनी सम्वेदना व्यक्त करते हुए कहा कि “उनकी सेवा व बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा. शान्ति की राह में सेवा प्रदान करते समय किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए.”
यूएन प्रमुख ने कहा कि शान्तिरक्षकों पर हमले अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन है और इन्हें युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है. “इन उल्लंघन मामलों के लिए जवाबदेही मांगी जानी चाहिए.”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की सुरक्षा व सलामती के लिए वह सदस्य देशों से निरन्तर क़दम उठाने का आग्रह करते रहेंगे.
यूएन महासचिव ने सोमवार को राजधानी जकार्ता में स्थित विदेश मंत्रालय में इंडोनेशिया को बहुपक्षवाद का एक स्तम्भ क़रार दिया और उत्तर व दक्षिण के बीच कूटनीतिक पुल का निर्माता भी.
उन्होंने बताया कि एक ऐसे समय जब हिंसक टकराव बढ़ रहे हैं, असमानता गहरा रही है और संस्थाओं में भरोसा दरक रहा है, अनेक हलकों से अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की अहमियत पर सवाल उठ रहे हैं.
मगर, “बहुपक्षवाद के साथ गहराती हताशा का जवाब, पहले से कम बहुपक्षवाद नहीं है. वह बेहतर बहुपक्षवाद है.”
इस विषय में, उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और यूएन सुरक्षा परिषद में सुधार पर बल दिया, ताकि वर्तमान दौर की वास्तविकताओं को परिलक्षित किया जा सके.
यूएन प्रमुख ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि ग़ाज़ा में दुस्वप्न का अन्त किया जाना होगा. शान्ति योजना को पूर्ण रूप से अमल में लाना ज़रूरी है और दो-राष्ट्र समाधान को आँखों के सामने ओझल नहीं होने दिया जा सकता है.