संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि कुछ दशक पहले खाद्यान्न की कमी से लेकर अब रिकॉर्ड उत्पादन तक, भारत में कृषि क्षेत्र में प्रगति नई तकनीकों, निवेश और किसानों की मेहनत के ज़रिए सम्भव हुई है और अब अगला क़दम हर एक व्यक्ति के लिए पौष्टिक भोजन की व्यवस्था करना, जलवायु प्रभावों से निपटना और आजीविकाओं को टिकाऊ बनाना है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP), खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के वरिष्ठ अधिकारियों ने बीते शुक्रवार को, ‘विश्व खाद्य दिवस’ के अवसर पर नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत के अनुभव व नवाचारी समाधान, अन्य विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
इस वर्ष, विश्व खाद्य दिवस की थीम है, “नवाचार आज. पोषण कल.” इसी सिलसिले में आयोजित एक चर्चा में यह समझने का प्रयास किया गया कि विज्ञान, टैक्नॉलॉजी, निवेश और साझीदारियों के ज़रिए किस तरह से कृषि-खाद्य प्रणालियों को मज़बूती दी जा सकती है.
भारत में यूएन के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर ने कहा कि वैज्ञानिक तौर-तरीक़ों, सार्वजनिक निवेश, और किसानों की मेहनत से देश में विशाल स्तर पर बदलाव ला पाना सम्भव हुआ है.
उन्होंने बताया कि, डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), कृषि के बेहतर तौर-तरीक़ों और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे में अनेक पहल शुरू की गई हैं, जिनके ज़रिए किसानों को समय पर जानकारी मिल रही है. वे जोखिमों से निपटने के लिए तैयार हो रहे हैं और बाज़ारों से भी जुड़ रहे हैं.
अनाज, दलहन, दूध, फल, सब्ज़ियों के मामले में भारत, विश्व के सबसे बड़े उत्पादक देशों में है.
देश में FAO के प्रतिनिधि ताकायुकी हागीवारा ने कहा कि, “खाद्यान्न की कमी से अधिशेष (surplus) उत्पादन तक भारत का सफ़र दिखाता है कि निरन्तर निवेश, नवाचार और मज़बूत साझेदारियों से क्या-कुछ हासिल किया जा सकता है.” उनके अनुसार, अब अगला क़दम हर एक व्यक्ति तक पौष्टिक भोजन पहुँचाने और बदलती जलवायु के झटकों के बीच कृषि-खाद्य प्रणालियों को मज़बूती देने का है.
IFAD के प्रतिनिधि जेम्स मार्क डी सूसा-शील्ड्स ने कहा, “भारत में कृषि नवाचार अक्सर किसानों, उनके संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों से शुरू होते हैं, जो ज़मीनी ज़रूरतों को सबसे बेहतर समझते हैं.”
उन्होंने बताया कि सही निवेश, तकनीक और साझेदारियाँ ऐसे छोटे प्रयासों को बड़े बदलाव में बदल सकती हैं.
यूएन एजेंसी के प्रतिनिधियों के अनुसार, कृषि क्षेत्र में बड़े स्तर पर नवाचारी समाधानों को लागू करने में भारत का अनुभव, वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) क्षेत्र में स्थित अन्य विकासशील देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.
इस अवसर पर, यूएन एजेंसियों के तीन नवाचारी समाधानों पर ध्यान केन्द्रित किया गया:
इस समारोह के दौरान, FAO युवा कृषि-खाद्य नवाचार चुनौती 2026 के चार विजेताओं को भी सम्मानित किया गया.
देश के विभिन्न हिस्सों से चुने गए इन युवाओं को बेहतर उत्पादन, बेहतर पोषण, बेहतर पर्यावरण और बेहतर जीवन की श्रेणियों में पुरस्कार मिले. इस पहल का उद्देश्य टिकाऊ खेती, पोषण और ग्रामीण आजीविका के लिए नए समाधान प्रोत्साहित करना है.
मुख्य अतिथि, भारत सरकार में नीति आयोग के सदस्य प्रोफ़ेसर के वी राजू ने कहा कि कृषि में बदलाव के लिए धन के साथ तकनीक, ज्ञान और प्रभावी साझेदारियाँ भी ज़रूरी हैं.
विश्व खाद्य दिवस का सन्देश भी यही है: नवाचार की असली सफलता नई मशीनों या खोजों में नहीं, बल्कि उस बदलाव में है, जो किसानों की आजीविका सुरक्षित करे और हर परिवार की थाली तक पौष्टिक भोजन पहुँचाए.
विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर, यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने भारत में WFP के संचार प्रमुख परविंदर सिंह से एक विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य सरकारों और अन्य साझीदारों के सहयोग से विकसित एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, महिला किसानों को मौसम और खेती से जुड़ी सलाह उपलब्ध कराता है.
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असम और ओडिशा राज्यों में छोटे खेतों पर निर्भर महिला किसानों के लिए मौसमी बदलाव एक बड़ी चुनौती है. कभी सूखा, तो कभी अचानक भारी बारिश, उनकी फ़सलों और आमदनी को ख़तरे में डाल देती है.
ऐसे में, स्थानीय भाषाओं में सही समय पर मिली जानकारी उनका बड़ा नुक़सान टाल सकती है, और उन्हें मौसम के बदलते मिज़ाज के अनुसार समय रहते फ़ैसले लेने और अपनी फ़सलों को नुक़सान से बचाने में मदद मिलती है.
उन्होंने 'गति चक्र’ नामक पहल का भी ज़िक्र किया, जोकि अनाज की ढुलाई के लिए बेहतर रास्ते सुझाने वाली एक डिजिटल प्रणाली है. इससे समय, ईंधन और ख़र्च की बचत होती है.