विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, वित्तीय संसाधनों की कमी की वजह से ग़ाज़ा में भूख से ग्रस्त परिवारों के लिए खाद्य सहायता में एक-तिहाई की कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे लगभग पाँच लाख लोग प्रभावित हुए हैं. उधर, हेती में आपराधिक गुटों की हिंसा अब ग्रामीण इलाक़ों में भी फैल रही है और आम लोगों को बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है.
अक्टूबर 2025 में इसराइल और हमास लड़ाकों के बीच युद्धविराम समझौता होने के बाद से अब तक, यूएन एजेंसी ने 16 लाख लोगों तक खाद्य पैकेट, आटा, ब्रैड, गर्म भोजन, पोषण व नक़दी सम्बन्धी मदद सुनिश्चित की है.
“मानवीय सहायता मार्ग में बेहतरी और सहायता आपूर्ति से खाद्य असुरक्षा में कमी लाने में मदद मिली थी, लेकिन यह प्रगति नाज़ुक बनी हुई है और यदि मानवीय सहायता धनराशि में गिरावट जारी रही तो यह जल्द ही पलट भी सकती है.”
इस वर्ष, सितम्बर महीने में WFP द्वारा 16 लाख फ़लस्तीनियों तक मदद पहुँचाई जा रही थी, लेकिन अक्टूबर में यह आँकड़ा घटकर 11 लाख रह गया है.
राशन की मात्रा में भी 50 फ़ीसदी की कटौती की गई है और अब परिवारों को दो के बजाय एक खाद्य पार्सल और गेहूँ के आटे का छोटा पैकेट दिया जा रहा है. 75 हज़ार परिवारों को मिलने वाली नक़दी सहायता के मूल्य में भी कमी आई है, और पूरे ग़ाज़ा में गर्म आहार की संख्या 2.5 लाख से घटकर 1.5 लाख रह जाएगी.
ग़ाज़ा में खाद्य सहायता में कमी एक ऐसे समय में हुई है जब वहाँ 80 फ़ीसदी से अधिक आबादी बेरोज़गार है. अनेक परिवारों के लिए ताज़ा भोजन, फल, सब्ज़ी सामर्थ्य से बाहर है.
67 फ़ीसदी आबादी, यानि लगभग 14 लाख लोग संकट या उससे भी ख़राब स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, हालांकि 2025 की तुलना में (77 फ़ीसदी), स्थिति में सुधार आया है. लेकिन यह मामूली है.
WFP ने ज़ोर देकर कहा है कि सर्दी के मौसम से पहले, अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है, ताकि ज़रूरतमन्द परिवारों के लिए आपात खाद्य सहायता को जारी रखा जा सके. यूएन एजेंसी ने तत्काल 45 करोड़ डॉलर की सहायता धनराशि की अपील जारी की है, जिससे ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में अगले वर्ष मार्च तक राहत अभियान जारी रखा जा सकता है.
यूएन एजेंसी के अनुसार, वित्तीय संसाधनों की क़िल्लत की वजह से पश्चिमी तट में भी उसके अभियान पर असर हुआ है, जहाँ सहायता पाने वाले लोगों की संख्या चार लाख से घटकर दो लाख रह गई है.
हेती में आपराधिक गुटों की हिंसा पर लगाम कसने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके जवाब में गैंग हिंसा अब ग्रामीण इलाक़ों में भी फैल रही है और आम नागरिकों को बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है.
देश में यूएन के शीर्ष अधिकारी कार्लोस रूइज़ मैसियु ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि सुरक्षा बलों के गहन अभियान के बीच, आपराधिक गैंग अपने तौर-तरीक़ों में बदलाव कर रहे हैं और यह चिन्ताजनक है.
हथियारबन्द गुट आम लोगों को बन्धक बना रहे हैं, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है और इलाक़ों में वर्चस्व बनाए रखने के लिए आम नागरिकों के विरुद्ध बदले की भावना से कार्रवाई हो रही है.
हेती में 13 दिसम्बर को राष्ट्रपति और विधायी चुनाव कराने की योजना थी, लेकिन फ़िलहाल उसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है. देश में 2016 के बाद से चुनाव नहीं कराए जा सके हैं.
यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि रूइज़ मैसियु ने कहा कि ज़मीनी वास्तविकताओं का आकलन किए बग़ैर, देश में चुनाव कराए जाने की तिथि तय नहीं की जा सकती है.
इस वर्ष, जुलाई से अक्टूबर के दौरान हेती में आपराधिक गुटों से सम्बन्धित हिंसा में 1,123 आम लोग मारे गए हैं और 440 घायल हुए हैं. यौन हिंसा को व्यापक तौर पर अंजाम दिया जा रहा है और जुलाई से अगस्त के दौरान 689 महिलाओं व लड़कियों के साथ गैंग सदस्यों ने बलात्कार किया.
देश में आपराधिक गुटों के दबदबे, हिंसा से निपटने के लिए सुरक्षा परिषद ने आपराधिक गिरोह दमन बल को स्वीकृति दी थी, जिसकी तैनाती की जा रही है. सुरक्षा परिषद ने 5,550 सुरक्षाकर्मियों को मंज़ूरी दी थी लेकिन 12 अक्टूबर तक केवल 1,563 वर्दीधारी सदस्यों की ही तैनाती हो पाई है.
विशेष प्रतिनिधि रूइज़ मैसियु ने बताया कि केवल सुरक्षा अभियान के ज़रिए, देश में स्थाई तौर पर स्थिरता को हासिल नहीं किया जा सकता है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने हेती में राजसत्ता की पूर्ण रूप से स्थाई बहाली पर बल दिया है.
साथ ही, आपराधिक गुटों द्वारा हथियार डालने और उन्हें समाज में फिर वापिस लाने के कार्यक्रम शुरू किए जाने होंगे, विशेष रूप से गैंग में भर्ती किए गए बच्चों के लिए. फ़िलहाल, देश में व्याप्त असुरक्षा, हेती में लोकतंत्र की दिशा में लौटने के लिए जोखिम है.