जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान के बढ़ने और अत्यधिक गर्मी होने से नई समस्याएँ उपज रही है: समय से पहले जन्म, शिशुओं का मृत पैदा होना, उनका वज़न कम होना और प्रसव के दौरान अन्य जटिलताएँ. एक नए विश्लेषण के अनुसार, ऊँचा तापमान और उसके दुष्प्रभाव लाखों गर्भवती महिलाओं के लिए बेचैनी को जन्म दे रहे हैं.
जलवायु परिवर्तन मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFCCC) के प्रमुख साइमन स्टील ने फ़िजी में एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि जलवायु कार्रवाई की एक परीक्षा यह है कि हम यह देखें कि नाज़ुक ज़िन्दगियों की किस तरह से रक्षा की जा रही है.
“बढ़ते तापमान का अर्थ है, गर्भावस्था में ख़तरे का बढ़ना.”
उन्होंने तुर्कीये के अंताल्या शहर में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप31) से पहले फ़िजी में एक मंत्रिस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए नए आँकड़ों का उल्लेख किया, जिन्हें परोपकारी फ़ाउंडेशन ‘वैलकम’ ने पाँच महाद्वीपों में पाँच देशों के स्वास्थ्यकर्मियों से हुई बातचीत के आधार पर जारी किया है.
73 फ़ीसदी का कहना है कि गर्मी की वजह से स्वास्थ्य जटिलताएँ पिछले पाँच वर्षों के दौरान बढ़ी हैं.
81 प्रतिशत ने चिन्ता जताई है कि अत्यधिक तापमान के कारण मातृत्व और नवजात शिशुओं की सेहत के लिए ख़तरा बढ़ेगा.
लगभग सभी प्रतिभागियों ने एक ऐसी गर्भवती महिला या बच्चे की देखभाल की है, जिन पर अत्यधिक गर्मी का असर हुआ है.
UNFCCC के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने बताया कि इन आँकड़ों के पीछे आम लोग और उनकी वास्तविकताएँ छिपी हैं: प्रसव के लिए ख़तरनाक गर्मी की वजह से एक माँ के क्लीनिक तक पहुँचने में देरी; असुरक्षित तापमान में काम कर रही एक दाई; और एक नवजात शिशु के लिए विशेषीकृत देखभाल की ज़रूरत.
यूएन के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि इस समस्या से वैसे तो कोई अछूता नहीं है, लेकिन इन जोखिमों का सभी पर समान रूप से असर नहीं होता है.
घर या कार्यालय से बाहर काम कर रहे लोग, बिना किसी नियम के बनी इमारत में रहने वाले लोग, दूर स्थित क्लीनिक जा रहे लोग या बिना जल, बिजली और तापमान ठंडा रखने की व्यवस्था में गुज़ारा कर रहे लोगों की रक्षा केवल सलाह के आधार पर नहीं की जा सकती है.
“ठंडक बनाए रखना कोई विकल्प ही नहीं है, जब लोगों के पास जाने के लिए कोई ठंडा स्थान ही न हो.”
उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का सुरक्षित हालात में जन्म लेना पहले से भौगोलिक स्थिति, आय व देखभाल तक पहुँच पर निर्भर है. अब ऊँचे तापमान से निजात पाने के लिए यदि क़दम नहीं उठाए गए तो यह इस अन्यायपूर्ण स्थिति को और गहरा करेगा.
कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने तीन प्राथमिकताओं पर बल दिया:
उन्होंने कहा कि, “जो बात किसी योजना में दर्ज नहीं होती, अक्सर उसके लिए न तो धन उपलब्ध कराया जाता है, न उसका आकलन किया जाता है और न ही उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है."
"जिस नुक़सान की गिनती नहीं होती, उसे आसानी से नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.”