संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, UNHCR ने मलेशिया से 1,476 लोगों को वापिस म्याँमार भेजे जाने पर चिन्ता जताई है, जहाँ गृहयुद्ध और गम्भीर मानवीय संकट के बीच, आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गम्भीर चिन्ता व जोखिम व्याप्त हैं.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने की कार्रवाई मंगलवार को शुरू की गई है.
UNHCR की संरक्षण मामलों की सहायक उच्चायुक्त ऐडेम वोसोर्नू ने कहा, “हमें ऐसे समय में इन लोगों को वापस भेजे जाने पर चिन्ता है, जब म्याँमार लौटने वाले लोगों को गम्भीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है और इस समूह में कुछ लोगों को अन्तरराष्ट्रीय संरक्षण की आवश्यकता हो सकती है.”
हालाँकि मलेशियाई अधिकारियों ने वापसी की प्रक्रिया को स्वैच्छिक बताया है. लेकिन ऐडेम वोसोर्नू ने कहा कि जिन लोगों को वापस भेजा गया, उन्हें पहले आप्रवासियों के तौर पर हिरासत में रखा गया था.
उन्होंने कहा, “इससे गम्भीर सवाल उठते हैं कि लौटने का फ़ैसला वास्तव में स्वतंत्र और पूरी जानकारी के आधार पर लिया गया था या नहीं.”
UNHCR का इन लोगों से सम्पर्क नहीं हो पाया था, इसलिए एजेंसी उनकी परिस्थितियों का आकलन नहीं कर सकी.
रोहिंग्या समुदाय, मुख्य रूप से म्याँमार का मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक समुदाय है. इस बौद्ध बहुल देश में सेना और विभिन्न प्रतिरोधी समूहों के बीच गृहयुद्ध जारी है.
2021 में सत्ता पर क़ाबिज़ हुई सेना ने रोहिंग्या समुदाय को बार-बार निशाना बनाया है. 2017 में राख़ीन प्रान्त में सैन्य कार्रवाई के बाद कई लाख रोहिंग्याओं को देश छोड़कर भागना पड़ा था.
आज, दस लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में शरण लिए हुए हैं.
UNHCR ने कहा कि मलेशिया को शरण और प्रवासन प्रबन्धन का अधिकार है, लेकिन किसी को वापस भेजने से पहले मज़बूत सुरक्षा उपाय ज़रूरी हैं. इनमें हर व्यक्ति की स्थिति का अलग-अलग आकलन और संरक्षण प्रक्रिया तक पहुँच शामिल है.
एजेंसी के अनुसार, वापसी का फ़ैसला स्वैच्छिक होना चाहिए और इसका आकलन हिरासत से बाहर किया जाना चाहिए.
UNHCR ने कहा कि किसी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस नहीं भेजा जाना चाहिए, जहाँ उसे उत्पीड़न, यातना या जीवन और स्वतंत्रता के लिए गम्भीर ख़तरे का सामना करना पड़ सकता हो.
एजेंसी ने ज़ोर दिया कि जब तक म्याँमार में सुरक्षित, गरिमापूर्ण और टिकाऊ वापसी की परिस्थितियाँ नहीं बनतीं, देशों को शरण तक पहुँच और अन्तरराष्ट्रीय संरक्षण सुनिश्चित करना चाहिए.
UNHCR ने म्याँमार में हिंसा समाप्त करने और राजनैतिक समाधान की दिशा में अधिक क्षेत्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की भी अपील की.