चीन के उपराष्ट्रपति हान ज़ेंग ने यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान अपने सम्बोधन में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुई अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि भूराजनैतिक टकरावों, गहराती विकास खाइयों और वैश्विक चुनौतियों की पृष्ठभूमि में, बहुपक्षवाद पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.
उन्होंने शनिवार को जनरल डिबेट के दौरान कहा कि दुनिया, युद्ध नहीं शान्ति चाहती है.
चीनी नेता के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून पर टिकी यह व्यवस्था, दूसरे विश्व युद्ध के बाद उभरी थी, और इसे बरक़रार रखा जाना होगा. इसके लिए यह ज़रूरी है कि विवादों का निपटारा एकतरफ़ा सैन्य कार्रवाई के बजाय सम्वाद के ज़रिए हो.
उन्होंने कहा कि एकतरफ़ा क़दम उठाने से यूएन चार्टर का उल्लंघन होता है और सुरक्षा परिषद की स्वीकृतियों को दरकिनार कर दिया जाता है.
उप राष्ट्रपति हान ने कहा कि बड़े देशों के कंधों पर विशेष दायित्व है कि अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा की रक्षा की जाए, और उन्हें नियमों का पालन करने, क़ानून के राज को बरक़रार रखने और सही निर्णय लेने में अगुवाई करनी होगी.
हान ज़ेंग ने मध्य पूर्व के विषय में कहा कि देशों की सम्प्रभुता का सम्मान किया जाना होगा और ग़ाज़ा में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को इस सिद्धान्त पर आगे बढ़ाना होगा कि फ़लस्तीनियों के लिए शासन व्यवस्था उन्हीं को सौंपी जाए. इसके समानान्तर, दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में लौटना होगा.
उन्होंने यूक्रेन के विषय में ध्यान दिलाया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चार-सूत्री सुझाव प्रस्तुत किया था, और इसी दिशानिर्देश के तहत, चीन इस संकट का राजनैतिक समाधान हासिल करने में सृजनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
चीनी नेता ने क्यूबा की नाकेबन्दी और उस पर थोपे गए प्रतिबन्धों को भी तुरन्त वापिस लेने की मांग की.
उन्होंने विकास के मुद्दे पर एकता व समानता के आधार पर वैश्विक साझेदारियों का आग्रह किया, जोकि सन्तुलित व समावेशी हों. निर्धनता उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा व ऊर्जा स्रोतों में बदलाव की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी होगी, और जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले के लिए वित्तीय संसाधन मुहैया कराने के लिए विकसित देशों को अपने वादों को पूरा करना होगा.
चीनी नेता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विषय में ‘व्यक्ति-केन्द्रित दृष्टिकोण’ को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि सकारात्मक और जनहितकारी उद्देश्यों के लिए एआई को विकसित किया जाना होगा. डिजिटल दरारों को पाटना और ऐसे विकास को बढ़ावा देना भी ज़रूरी है जिसका लाभ सभी तक पहुँच सके.
उन्होंने कहा कि “संरक्षणवाद से किसी की जीत नहीं होगी,” और इसलिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर आधारित व्यवस्था की रक्षा की जानी होगी.
उप राष्ट्रपति हान ने कहा कि विविधता ने विश्व भर में भव्यता को बढ़ावा दिया है और दूसरी संस्कृतियों के साथ सम्वाद में अहंकारपूर्ण उपेक्षा और स्व-केन्द्रित मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रति समर्थन दोहराते हुए कहा कि “बहुपक्षवाद उन विपत्तियों से गुज़रने के बाद मानवता द्वारा चुना गया एक विकल्प है, और सभी देशों के लोगों के लिए निष्पक्षता व न्याय साझा आकाँक्षा हैं.
उप राष्ट्रपति हान ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन किया, मगर कहा कि इन सुधारों से यूएन के निकायों और उनके अधिकार-क्षेत्र में कटौती करने के बजाय उन्हें मज़बूती देनी होगी. इस प्रक्रिया के ज़रिए वैश्विक दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित विकासशील देशों, ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ को प्रभावी बनाना होगा.
उन्होंने यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की प्रशंसा की, जिनका कार्यकाल 2026 के अन्त में समाप्त हो रहा है. उप राष्ट्रपति हान के अनुसार, चीन की इच्छा है कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में ऐसा व्यक्ति चुना जाए जो “संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करे, असाधारण क्षमता रखता हो, ईमानदारी व निष्पक्षता बनाए रखे और साहस व समर्पण का परिचय दे.”
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में चीन ने वैश्विक आर्थिक वृद्धि में लगभग 30 प्रतिशत योगदान दिया है, और ‘वैश्विक विकास पहल’ के तहत 23 अरब डॉलर से अधिक धनराशि की लामबन्दी की है. साथ ही, बिना किसी आयात शुल्क (टैरिफ़) के अफ़्रीकी देशों और सबसे कम विकसित देशों की आर्थिक प्रगति में भागेदारी सुनिश्चित की है.