संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को चेतावनी दी कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) भारी दबाव के बीच काम कर रही है और उसका कामकाज व शासनादेश दोनों ख़तरे में हैं.
न्यूयॉर्क में UNRWA की वार्षिक मंत्रीस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए महासचिव ने बताया कि ग़ाज़ा में एजेंसी के लगभग 400 कर्मचारी मारे जा चुके हैं. वहीं, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में उसके सैकड़ों परिसरों तक पहुँच रोक दी गई है, या उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त अथवा पूरी तरह तबाह कर दिया गया है.
उन्होंने कहा, “ये कृत्य पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर समेत अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत इसराइल के दायित्वों के विपरीत हैं.”
महासचिव ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में भी UNRWA फ़लस्तीनियों को ज़रूरी सेवाएँ मुहैया करा रही है, लेकिन उसका कामकाज और संयुक्त राष्ट्र महासभा से मिला शासनादेश अब ख़तरे में है.
लगभग दो वर्ष पहले इसराइली संसद ने एक क़ानून पारित कर पूर्वी येरूशलम समेत इसराइली क्षेत्र में UNRWA के कामकाज पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. साथ ही, इसराइली अधिकारियों और एजेंसी के बीच सभी तरह का सहयोग भी रोक दिया गया था.
इस वर्ष जनवरी में इसराइली सरकार ने येरूशलम में UNRWA के मुख्य परिसर पर क़ब्ज़ा कर उसे ध्वस्त करना शुरू कर दिया.
संयुक्त राष्ट्र और अनेक देशों के अनुसार, ये दंडात्मक क़ानून संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवीय सहायता कर्मियों की सुरक्षा से सम्बन्धित सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2730 के तहत इसराइल के दायित्वों का उल्लंघन करते हैं.
यूएन प्रमुख के अनुसार, ग़ाज़ा और अन्य क्षेत्रों में मानवीय सहायता अभियानों से जुड़ी समन्वय बैठकों से UNRWA को बाहर रखा जा रहा है. इसराइल अब एजेंसी के कर्मचारियों को वीज़ा भी जारी नहीं कर रहा है और उन्हें डराने-धमकाने की घटनाएँ भी सामने आई हैं.
उन्होंने बताया कि UNRWA गम्भीर वित्तीय संकट से जूझ रही है और उसके पास 10 करोड़ डॉलर की नक़दी की कमी है. इससे एजेंसी का कामकाज और लाखों फ़लस्तीनी शरणार्थियों का कल्याण ख़तरे में पड़ गया है.
महासचिव ने सदस्य देशों से तत्काल कार्रवाई की अपील करते हुए चेतावनी दी कि UNRWA की काम करने की क्षमता गम्भीर संकट में है और क्षेत्रीय स्थिरता भी दाँव पर लगी है.
महासचिव ने कहा कि इसराइली हमलों में हर दिन औसतन चार लोग मारे जा रहे हैं, जिनमें एक चौथाई बच्चे हैं. वहीं, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का खुलेआम उल्लंघन जारी है.
उन्होंने कहा, “पिछले अक्टूबर में युद्धविराम की घोषणा के बाद मानवीय सहायता की बहाली से कुछ राहत मिली है, लेकिन हालात अब भी असहनीय हैं.”
महासचिव के अनुसार, पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के विस्तार और वहाँ बसने वाले इसराइलियों के हमलों ने फ़लस्तीनियों को सहनशक्ति की चरम सीमा तक पहुँचा दिया है. इससे दो-राष्ट्र समाधान भी ख़तरे में पड़ गया है.
इन अस्थिर हालात में भी UNRWA क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है और अनेक फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है.
UNRWA के कार्यवाहक महाआयुक्त क्रिश्चियन सॉन्डर्स ने बताया कि ग़ाज़ा में एजेंसी के 10 हज़ार से अधिक कर्मचारी अब भी 17 लाख लोगों को सहायता पहुँचा रहे हैं. इनमें हर सप्ताह लगभग 70 हज़ार चिकित्सा परामर्श भी शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि पश्चिमी तट में विस्थापन 1967 के बाद से अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है.
महाआयुक्त के अनुसार, UNRWA की निष्पक्षता की स्वतंत्र समीक्षा में पेश की गई 50 सिफ़ारिशों में से 41 पूरी तरह लागू की जा चुकी हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंसी का आकार छोटा करने का अर्थ उसके शासनादेश में बदलाव नहीं है.
उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा में 94 प्रतिशत लोगों के पास उचित आश्रय नहीं है, जबकि 98 प्रतिशत परिवार खुले सीवेज और मलबे जैसे पर्यावरणीय ख़तरों के आसपास रह रहे हैं. मानवीय सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि सर्दियाँ नज़दीक आने के साथ सहायता व्यवस्था में बड़ी कमियाँ बनी हुई हैं.
क्रिश्चियन सॉन्डर्स ने कहा कि क़ाबिज़ पूर्वी येरूशलम में UNRWA के विरुद्ध उठाए गए क़दमों के तहत उसके मुख्यालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र, स्कूलों और स्वास्थ्य केन्द्रों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया है.
उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि वे क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में UNRWA को उसके शासनादेश के अनुरूप काम करने के लिए ज़रूरी अवसर और परिस्थितियाँ मुहैया कराने की पैरवी करें.
वहीं बैठक की सह-मेज़बानी करने वाले जॉर्डन, स्पेन और ब्राज़ील ने UNRWA के शासनादेश को बनाए रखने और वित्तीय सहायता बढ़ाने पर ज़ोर दिया. जॉर्डन ने कहा कि एक सम्प्रभु फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना तक एजेंसी की ज़रूरत बनी रहेगी, जबकि ब्राज़ील ने उसके संकट को राजनैतिक बताते हुए पूर्वी येरूशलम में एजेंसी के परिसरों को बन्द करने और तबाह किए जाने की निन्दा की.