ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऐंडी बर्नहैम ने घरेलू स्तर पर और विदेश में जानबूझकर फैलाई जाने वाली झूठी जानकारी (disinformation) का सख़्ती से मुक़ाबला करने की बात कही है. उन्होंने मंगलवार को यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के लिए वैश्विक बचाव मानक तय किए जाने पर भी बल दिया है.
ब्रिटेन के नेता ने कहा कि हाल के विर्षों में शत्रुतापूर्ण तत्वों ने सूचना के माहौल पर औद्गोयिक स्तर के हमले किए हैं, न केवल ब्रिटेन में बल्कि अन्य साथी देशों पर भी.
उन्होंने विश्व नेताओं को बताया कि रूसी एजेंसियों ने झूठ फैलाने और लोगों के भय को भुनाने के लिए इरादे से हरसम्भव कोशिश की है, जिनमें फ़र्ज़ी वैबसाइट, झूठे लेखों और इटंरनेट बोट्स का सहारा लिया गया है.
प्रधानमंत्री बर्नहैम ने आरोप लगाया कि, “उन्होंने धुर-दक्षिणपंथी वृतान्तों को हवा दी है. और हमारे पास साक्ष्य हैं कि उन्होंने 2019 के आम चुनाव में भी हस्तक्षेप की कोशिश की.”
“हम यह भी जानते हैं कि उन्होंने भयावह घटनाओं की पृष्ठभूमि में तनाव व अशान्ति भड़काने की भी कोशिशें की हैं.”
ब्रिटेन के साउथपोर्ट शहर में क़रीब दो वर्ष पहले, एक नृत्य कक्षा में तीन छोटी बच्चियों की चाकूबाज़ी की घटना में जान चली गई थी, जिसके बाद ऑनलाइन माध्यमों पर झूठी जानकारी के फैलने की वजह से से दंगे भड़क उठे थे.
उन्होंने कहा कि रूस ने जानकारी को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के इरादे से लगभग 1.7 अरब डॉलर ख़र्च किए हैं. ब्रिटेन की कई कम्पनियों और संस्थानों ने भी साइबर हमलों का सामना किया है. “और हम जानते हैं कि एआई की वजह से यह ख़तरा कई गुना बढ़ रहा है.”
प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन में एक नया राष्ट्रीय सूचना रक्षा केन्द्र (National Centre for Information Defence) स्थापित करने की घोषणा की. यह केन्द्र सूचना सम्बन्धी हमलों का पता लगाएगा, उनके स्रोत की पहचान और उन्हें बाधित करेगा, साथ ही देश के लोकतंत्र का समर्थन और उसकी रक्षा भी.
ब्रिटेन के नेता ने बताया कि इस अनुभव का उपयोग दूसरे देशों की मदद के लिए भी किया जाएगा. जैसेकि मोल्दोवा को चुनाव प्रक्रिया में कथित रूसी हस्तक्षेप से सुरक्षा में सहायता दी गई है.
प्रधानमंत्री बर्नहैम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विषय में Frontier AI, यानी इस टैक्नॉलॉजी के सबसे उन्नत स्तर, को वर्तमान दौर की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों और अवसरों में से एक क़रार दिया.
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक नई AI रक्षा साझेदारी विकसित करने में जुटा है.
उनके अनुसार, एआई से जुड़े मूलभूत निर्णय संयोग या परिस्थितियों के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते हैं और “इन्हें निर्वाचित सरकारों द्वारा लिया जाना होगा, जो लोगों की सेवा के लिए समर्पित हो.
इस सन्दर्भ में, ब्रिटेन ने विशेषज्ञों और संस्थाओं को एक साथ लाने की बात कही है ताकि एआई की सकारात्मक सम्भावनाओं को साकार किया जा सके और साथ ही उससे जुड़े जोखिमों से निपटा जाए.