संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट कहती है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, व्यापार बाधाओं और ऊँचे क़र्ज़ के जोखिमों के बावजूद, दक्षिण और पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में, आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि बनी रहने की उम्मीद है. घरेलू मांग को सहारा देने वाली नीतियाँ, इन क्षेत्रों को वैश्विक दबावों से निपटने में मदद कर रही हैं.