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स्टडी में बताया गया कि अपोलो मिशनों के दौरान चांद पर हल्के भूकंप (Moonquakes) दर्ज हुए थे। लेकिन पारंपरिक भूवैज्ञानिक मान्यता यह थी कि चांद के भीतर की गतिविधियां लगभग रुक चुकी हैं। इसी कारण चांद पर भूकंप के खतरों का आकलन ज्यादा नहीं किया गया था