हमास और फ़लस्तीन के अन्य हथियारबन्द गुटों द्वारा इसराइल पर किए गए हमलों के तीन वर्ष पूरे होने पर, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने एक वक्तव्य में कहा है कि 7 अक्टूबर 2023 को हुए अत्याचारों को किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है. साथ ही, उन्होंने इसराइलियों और फ़लस्तीनियों की पीड़ा का अन्त करने की पुकार लगाई है.
उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर इन जघन्य, आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया था, जिनमें 1,200 से अधिक इसराइली और विदेशी नागरिक मारे गए थे. आम नागरिकों को जानबूझकर उनके घरों, समुदायों और संगीत उत्सव में निशाना बनाया गया.
वहीं, महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों समेत 251 लोगों को अगवा कर लिए जाने के बाद ग़ाज़ा पट्टी में बन्धक के तौर पर ले जाया गया.
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि इन बन्धकों ने क़ैद के दौरान यातना, यौन हिंसा और अन्य क्रूर, अमानवीय, अपमानजनक बर्ताव को झेला. कुछ बन्दियों को उनके अपहरणकर्ताओं ने मार डाला या फिर लड़ाई के दौरान हिंसा में उनकी जान गई.
“इन अत्याचारों को किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है.”
यूएन प्रमुख ने बताया कि उन्होंने उन इसराइली परिवारों से मुलाक़ात की है, जिनकी दुनिया उस दिन चकनाचूर हो गई थी, और इन हमलों में जीवित बच गए लोगों को भी सुना जो आज भी गहरे शारीरिक व भावनात्मक घावों से गुज़र रहे हैं.
उन्होंने इन हमलों के बाद ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी आबादी की बयाँ न की जा सकने वाली पीड़ा को भी ध्यान दिलाया. यूएन एजेंसियों के अनुसार, इसराइली सैन्य कार्रवाई में 70 हज़ार से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 20 हज़ार बच्चे हैं. एक लाख से अधिक लोग घायल हुए हैं.
ग़ाज़ा की आबादी 21 लाख है, जिनमें से लगभग सभी विस्थापित हैं और पूरा क्षेत्र बर्बाद हो चुका है. यहाँ घायल बच्चों के अंग कटने का अनुपात दुनिया में सबसे अधिक है.
“आम नागरिक अब भी असहनीय परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं. उनकी पीड़ा का भी अन्त होना चाहिए, अभी.”
ग़ाज़ा में अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू होने के बाद स्थानीय आबादी को कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब भी वहाँ पर्याप्त सुरक्षा, मानवीय सहायता और पुनर्बहाली व शान्ति का रास्ता तैयार नहीं हो पाया है.
यूएन एजेंसियों ने बताया है कि ग़ाज़ा में मानवीय सहायता के लिए इसराइली पाबन्दियाँ अब भी जारी हैं और लगभग हर दिन घातक हमले होते हैं.
महासचिव गुटेरेश ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत युद्धविराम के अगले चरण के लिए संकल्पों को अमल में लाया जाना होगा.
उन्होंने कहा कि यह समय इस युद्धविराम को स्थाई बनाने और बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता को वहाँ पहुँचाने का है. इसे शोक के एक और वर्ष के बजाय, एक अलग भविष्य को आकार देने के संकल्प का प्रतीक बनाना होगा.