पिछले कई वर्षों से गृहयुद्ध की आंच में झुल रहे सूडान में हाल के दिनों में ड्रोन हमलों में तेज़ी आई है, जिससे दारफ़ूर, कोर्दोफ़ान ख़ारतूम समेत कई प्रान्तों में बड़ी संख्या में लोग हताहत हो रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने इन हमलों में आम नागरिकों, घरों, बाज़ारों, स्कूलों, अस्पतालों और आश्रय स्थलों को निशाना बनाए जाने की कठोर निन्दा की है.
यूएन कार्यालय ने बताया है कि सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF), दोनों पक्षों द्वारा किए जा रहे ड्रोन हमले स्थानीय आबादी के लिए घातक साबित हो रहे हैं. अक्टूबर महीने के पहले तीन सप्ताह के दौरान ही कम से कम 306 लोगों की जान गई है और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं.
सूडान की सशस्त्र सेना और अतीत में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर हिंसक टकराव भड़क उठा था, जिससे एक बड़ा मानवीय व विस्थापन संकट उपजा.
दो करोड़ लोगों के पास भरपेट भोजन नहीं है, लाखों लोग अन्य देशों व सूडान के ही अन्य हिस्सों में विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को जारी अपने वक्तव्य में कहा कि ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल, इस वर्ष सूडान में हिंसा में मारे जाने आम नागरिकों के एक बड़े हिस्से की वजह है और यह बेहद परेशान कर देने वाली बात है.
OHCHR द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, विस्थापितों के लिए बनाए गए केन्द्रों पर अनेक हमले हुए हैं, जहाँ लड़ाई में जान बचाकर आए लोगों ने आश्रय लिया हुआ था. 6 से 10 अक्टूबर के दौरान, पश्चिम कोर्दोफ़ान में महिलाओं व बच्चों समेत 25 लोग मारे गए हैं. इन हमलों के लिए सरकारी सैन्य बलों पर आरोप लगे हैं.
वहीं, 9 अक्टूबर को RSF के एक तथाकथित हमले में ब्लू नाईल प्रान्त में एक विस्थापन केन्द्र के पास, सोने के खनन में जुटे 31 लोग मारे गए. 18 अक्टूबर को पश्चिम कोर्दोफ़ान के एक इलाक़े में भीषण हमले में कम से कम 139 लोगों की जान गई.
इन हमलों में बाज़ारों और अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया है. यूएन कार्यालय का कहना है कि बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं, जिनमें अनेक आन्तरिक रूप से विस्थापित हैं, और बुनियादी ढाँचे व सेवाओं को भी नुक़सान पहुँचा है.
यूएन उच्चायुक्त ने सभी पक्षों से अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपने तयशुदा दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया है और आम नागरिकों व बुनियादी प्रतिष्ठानों पर सीधे हमले नहीं करने की अपील जारी की है.
साथ ही, उन्होंने ध्यान दिलाया है कि युद्धविराम पर सहमति बनाने और शान्ति स्थापना के प्रयासों में यह सुनिश्चित करना होगा कि हथियारों की आपूर्ति पर लगाम कसी जाए, जिससे हिंसक टकराव को हवा मिल रही है.