यमन में हूथी लड़ाकों और अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के सुरक्षा बलों में भीषण टकराव के बीच, ताइज़ शहर की घेराबन्दी को 20 दिन बीत चुके हैं, जिसकी वजह से मानवीय सहायताकर्मियों के लिए वहाँ प्रवेश कर पाना सम्भव नहीं है, और आम लोग भी जान बचाने के लिए किसी अन्य स्थान पर जाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं.
मानवीय सहायता मामलों के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के प्रवक्ता येन्स लार्क ने शुक्रवार को जिनीवा में बताया कि ताइज़ में आपात स्थिति बनती जा रही है.
शहर पहुँचने के लिए सड़क मार्ग से सम्पर्क काट दिया गया है, और पिछले कुछ दिनों में बहुत कम मात्रा में ही ईंधन, भोजन और अन्य सामान की आपूर्ति हो पाई है.
हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) और अदन में स्थित अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के सुरक्षा बलों के बीच सितम्बर में नए सिरे से लड़ाई भड़क उठी थी, जिससे देश का तीसरा सबसे बड़ा शहर, ताइज़ सबसे अधिक प्रभावित है
2022 में हुए संघर्षविराम के बाद यमन में पसरी अपेक्षाकृत शान्ति अब टूट गई है.
इस वर्ष, 7 जून से 19 अक्टूबर के बीच, यूएन प्रवासन एजेंसी द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, 2.58 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से अधिकाँश ताइज़ और लहज इलाक़ों में हैं.
अधिकाँश परिवारों को बार-बार विस्थापित होना पड़ रहा है और वे ऐसे विस्थापन केन्द्रों में शरण ले रहे हैं, जहाँ अत्यधिक भीड़भाड़ है. अगस्त 2026 से अब तक, लड़ाई में 1,574 लोग मारे जा चुके हैं और लगभग सात हज़ार घायल हुए हैं.
ताइज़ को अदन से जोड़ने वाले एकमात्र आपूर्ति मार्ग को हूथी लड़ाकों ने बन्द कर दिया है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतों में उछाल आया है और बड़ी संख्या में लोगों के पास भोजन व बुनियादी सामान के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, ताइज़ में आठ लाख लोगों के लिए सहायता अवरुद्ध हो गई है, जिनमें दो लाख महिलाएँ व बच्चे हैं.
यूएन एजेंसी के क्षेत्रीय संचार अधिकारी अज़फ़र दीन ने बताया कि हम ताइज़ तक फिर पहुँच हासिल करने के लिए पुरज़ोर प्रयास कर रहे हैं और यमन के अन्य हिस्सों में भी राहत अभियान को समर्थन दे रहे हैं.
OCHA प्रवक्ता ने बताया कि ताइज़ में जल की आपूर्ति भी लड़खड़ा रही है, चूँकि अधिकाँश स्थानीय आबादी के लिए ट्रकों के ज़रिए जल आपूर्ति की जाती रही है.
“सड़कें बन्द होने और ट्रक चलाने के लिए डीज़ल के कम होते जाने से, शहर में जल उत्पादन में लगभग 50 फ़ीसदी तक की गिरावट आई है. और ट्रक के ज़रिए जल पहुँचाने की लागत क़रीब तीन गुना बढ़ चुकी है.”
“आप कल्पना कर सकते हैं कि वहाँ फँसे लोगों पर इसका क्या असर होगा.”
उधर, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने देश में व्यापक भूख संकट पर चिन्ता व्यक्त की है. ताइज़ में इस वर्ष 1.68 लाख बच्चों की जाँच की गई थी, जिनमें से 52 हज़ार से अधिक कुपोषण और 11 हज़ार से अधिक अति गम्भीर कुपोषण का शिकार हैं.
यूएन एजेंसी ने खाने के लिए तैयार, चिकित्सीय आहार के आठ हज़ार डिब्बों की पहले से ही व्यवस्था कर ली थी, ताकि कुपोषण प्रभावित बच्चों का उपचार किया जा सके. इस आपूर्ति से तीन महीनों के लिए मदद मिल सकती है.
मगर, खाद्य भंडार होने के बावजूद, आपूर्ति मार्ग में व्यवधान आने और पहुँच पाना कठिन हो जाने की वजह से इन्हें ज़रूरतमन्द परिवारों को मुहैया करा पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है.