हिंसक टकरावों और लम्बे समय से जारी संकटों के कारण जबरन विस्थापितों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जबकि मानवीय सहायता प्रयासों के लिए धन कटौती के कारण सहायता के लिए संसाधन सिमटते जा रहे हैं. यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNCHR) ने आगाह किया है कि इस वर्ष, संगठन को 8.5 अरब डॉलर की आवश्यकता थी, लेकिन फ़िलहाल तीन अरब डॉलर ही जुटाए जा सके हैं.
एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होने वाले लोगों की संख्या 11.7 करोड़ पहुँच गई है.
यूएन एजेंसी प्रमुख बरहम सालेह ने सोमवार को जिनीवा में कार्यकारी समिति की बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया कि इस आँकड़े के पीछे दर्दनाक, त्रासदीपूर्ण मानवीय वास्तविकताएँ छिपी हुई हैं.
मगर, उन तक पर्याप्त स्तर पर मदद पहुँचाने के लिए सहायता धनराशि की क़िल्लत है, जिससे “शरण की तलाश कर रहे लोगों के लिए वैश्विक समर्थन प्रणाली के दरक जाने का जोखिम है.”
यूएन शरणार्थी संगठन, UNHCR को दूसरे विश्व युद्ध के बाद, इस संकल्प के साथ स्थापित किया गया था कि उत्पीड़न से बचकर भाग रहे लोगों को संरक्षण दिया जाना चाहिए. उन्हें उन स्थानों पर वापिस नहीं भेजा जाना चाहिए, जहाँ उनकी जान के लिए ख़तरा हो सकता है.
सहायता धनराशि में विशाल कटौतियों के बीच, इस प्रतिबद्धता पर भीषण दबाव है. यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि सम्वेदनशील हालात से जूझ रहे लोग, बिना पर्याप्त मदद के ही जीवन गुज़ार रहे हैं. “कम [संसाधनों] के साथ ज़्यादा प्रयास करने और असम्भव को कर दिखाने के लिए कहने के बीच अन्तर होता है.”
उच्चायुक्त सालेह ने गहरे बदलाव के दौर में सुधार प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि UNHCR कर्मचारियों के लिए भी यह बेहद कठिन समय रहा है.
ख़र्चों में नियंत्रण किया गया है, दक्षता बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं और कार्यबल में भी बदलाव किए गए हैं. वर्ष 2024 में, लगभग 20 हज़ार कर्मचारी थे, जोकि अब घटकर 12 हज़ार ही रह गए हैं.
“दक्षता हासिल करने की सीमा होती है. एक समय ऐसा आता है जब कम हो रहे संसाधनों की भरपाई दक्षता से भी नहीं की जा सकती है.”
उन्होंने सचेत किया कि जब धनराशि एक सीमा से नीचे गिर जाती है तो उसके दुष्परिणाम अमूर्त नहीं होते हैं, बल्कि उस पर निर्भर लोगों द्वारा झेले जाते हैं.
उन्होंने बताया कि सूडान में अपर्याप्त धनराशि की वजह से, यौन हिंसा के 50 हज़ार प्रभावितों के लिए मेडिकल देखभाल, क़ानूनी सहायता और मनोसामाजिक समर्थन सेवाओं पर जोखिम है.
वहीं चाड में, अकेले और अपने अभिभावकों से अलग हो गए हज़ारों बच्चों के लिए संरक्षण सेवाओं को जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
इथियोपिया में, दक्षिण सूडान और ऐरीट्रिया से आने वाले हज़ारों शरणार्थियों के लिए पंजीकरण व्यवस्था को रोकना पड़ा है, जबकि लाखों अन्य राष्ट्रीय पहचान प्रणाली में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
महिलाओं व लड़कियों पर हिंसा व शोषण की चपेट में आने का जोखिम है, बच्चे कई वर्षों की शिक्षा से वंचित हो सकते हैं और विकलांगजन को भी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है.
विश्व भर में धधकते संकटों से जबरन विस्थापित होने के लिए मजबूर लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि उन तक मदद पहुँचाने में सरकारें और सहायता एजेंसियाँ पिछड़ रही हैं.
2026 में, यूएन शरणार्थी एजेंसी ने 18 देशों में 22 आपात स्थितियों में सहायता के लिए प्रयास किए हैं. बढ़ती मानवीय आवश्यकताओं के बावजूद, यूएन एजेंसी को अपनी आवश्यकता का केवल एक-तिहाई ही प्राप्त हो पाया है.
UNHCR प्रमुख बरहम सालेह ने चेतावनी दी है कि पिछले कई दशकों से शरणार्थियों को शरण देने वाले देश, अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता के अभाव की वजह से हताश हैं, और शरणार्थी अपनी सलामती के लिए चिन्तित हैं.
उन्होंने कहा कि हम सफलता का दावा केवल इसलिए नहीं कर सकते हैं चूँकि सहायता घट गई है या ज़िम्मेदारी को मेज़बान देशों पर छोड़ दिया गया है. इस सफलता को लोगों की ज़िन्दगी में आए सुधार, उनकी आत्मनिर्भरता और अपने समुदायों के लिए योगदान से आंका जाएगा और इसके लिए मानवीय समर्थन की आवश्यकता होगी.