संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुबई से इसराइल की राजधानी तेल अवीव जा रहे एक विमान में हुई हिंसक घटना पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, जिसमें एक सह-चालक ने कथित तौर पर विमान को अपने क़ब्ज़े में लेकर गिराने और यात्रियों को मारने की कोशिश की.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को हुई इस घटना में हमलावर पायलट ने बीच उड़ान में ही अपने साथी पायलट पर धारदार हथियार से हमला किया, जिससे वो गम्भीर रूप से ज़ख़्मी हो गया.
इस हाथापाई के दौरान, विमान का सन्तुलन बिगड़ा और वह केवल 30 सेकेंड के भीतर 17 हज़ार फ़ीट नीचे तक आ गया.
घायल चालक ने किसी तरह से दरवाज़ा खोला, जिसके बाद विमान चालक दल के अन्य सदस्यों और यात्रियों ने कॉकपिट में प्रवेश किया, हमलावर पायलट को अपने क़ाबू में लिया, विमान को सम्भाला और फिर सऊदी अरब के तबूक में आपात लैंडिंग कराई गई.
यूएन प्रमुख ने गुरूवार को जारी अपने वक्तव्य में राहत जताई कि एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया गया. उन्होंने आम लोगों के जीवन और नागरिक विमानन सुरक्षा को जोखिम में डालने वाले किसी भी कृत्य की कठोर निन्दा की है.
उन्होंने सभी यात्रियों की सुरक्षा व सलामती सुनिश्चित करने और इस घटना की जाँच आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक एजेंसियों के प्रति आभार व्यक्त किया है. महासचिव ने कहा कि इस मामले से जुड़े पहलुओं पर नज़र रखी जाएगी.
यूक्रेन में मानवीय सहायता दलों ने बताया है कि रूसी सैन्य बलों द्वारा ऊर्जा नैटवर्क को निशाना बनाया जाना जारी है, और इसलिए सर्दी के मौसम में बचाव के लिए इंतज़ाम में तेज़ी लानी होगी.
गुरूवार को जारी एक ऐलर्ट में आगाह किया गया है कि पिछले वर्ष लाखों लोग जमा देने वाली सर्दी में लम्बी अवधि के लिए तापन व्यवस्था (heating), जल व आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो गए थे.
लड़ाई के अग्रिम मोर्चे वाले इलाक़ों में स्थानीय आबादी हमलों की चपेट में आई है, लोग बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं, उनके घरों को क्षति पहुँची है और रूसी आक्रमण के चार वर्ष बाद भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं.
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिन्ता जताई है कि राजधानी कीव समेत अन्य प्रमुख वितरण केन्द्रों पर लॉजिस्टिक व भंडारण स्थलों पर हमले बढ़े हैं, जहाँ खाद्य सामग्री को रखा गया था.
सर्दी के मौसम में बिजली, हीटिंग, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान बढ़ने की आशंका है.
यूक्रेन में इस वर्ष के पहले छह महीनों के दौरान, हमलों में लगभग 1,400 आम नागरिकों की जान गई है और आठ हज़ार से अधिक घायल हुए हैं. पिछले वर्ष, इसी अवधि की तुलना में यह हताहतों की संख्या में 37 फ़ीसदी की वृद्धि को दर्शाता है.
स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमलों में भी चिन्ताजनक वृद्धि हुई है और इस वर्ष अब तक 325 हमलों में जानकारी जुटाई गई है, जिनमें 16 लोग मारे गए हैं और 142 घायल हुए हैं.