म्याँमार में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसक टकराव, आर्थिक उथलपुथल, विस्थापन और अन्य चुनौतियों ने देश की उस बुनियाद को ही कमज़ोर कर दिया है, जिन पर स्थानीय आबादी अपने जीवन-व्यापन के लिए निर्भर है. इन हालात में, आम नागरिकों को अनेक मोर्चों पर निर्धनता, संसाधनों व आवश्यक सेवाओं के अभाव से जूझना पड़ रहा है.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की नवीनतम रिपोर्ट में म्याँमार में निर्धनता की स्थिति को अनेक कसौटियों पर, बहुआयामी ढंग से परखा गया है.
बहुआयामी निर्धनता के लिए यह आंका जाता है कि आम लोग किस तरह से ग़रीबी का अनुभव कर रहे हैं, जिसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा व रहन सहन के स्तर को दर्शाने वाले अनेक संकेतकों का सहारा लिया जाता है: पोषण, बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा की अवधि, खाना पकाने के लिए ईंधन, साफ़-सफ़ाई, पेयजल, बिजली, आवास और सम्पत्ति.
यदि लोग इनमें से तीन या उससे अधिक संकेतकों पर वंचना का शिकार हैं, तो उन्हें बहुआयामी निर्धन माना जाता है.
UNDP के अनुसार, म्याँमार में लोग स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा और अच्छे रहन-सहन समेत कई अन्य मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में हैं. 68 प्रतिशत आबादी, यानि 3.7 करोड़ या तो बहुआयामी निर्धनता में जीवन ग़ुज़ार रहे हैं या उन पर इसमें धँसने का जोखिम है.
यूएन रिपोर्ट दर्शाती है कि म्याँमार केवल आय संकट का सामना नहीं कर रहा है. अतीत में लोग किसी समस्या से उबरने में अनेक साधनों पर निर्भर रहे हैं, जैसेकि धन की बचत, आजीविका की स्थिरता, सेवाओं की सुलभता और सामाजिक समर्थन के लिए नैटवर्क.
मगर, वर्तमान परिस्थितियों में ये सभी विकल्प लुप्त होते जा रहे हैं, और हर तीन में से दो व्यक्ति या निर्धनता की चपेट में है या फिर उन पर इसका जोखिम है. लाखों लोगों के पास संकटों का सामना करने की क्षमता नहीं है.
फ़रवरी 2021 में, म्याँमार की सेना ने, लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई तत्कालीन सरकार को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था और राष्ट्रपति, स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची समेत सैकड़ों अधिकारियों, राजनैतिक नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था.
तभी से देश एक विशाल मानवीय व मानवाधिकार संकट से जूझ रहा है, जोकि समय बीतने के साथ और अधिक गहरा हुआ है. घर-परिवारों के लिए स्वास्थ्य देखभाल, पर्याप्त आवास, स्वच्छ जल, साफ़-सफ़ाई और अन्य अति-आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता कठिन हो गई है, विशेष रूप से हिंसा प्रभावित इलाक़ों में.
एशिया प्रशान्त क्षेत्र के लिए यूएन विकास कार्यक्रम की निदेशक कन्नी विग्नाराजा ने बताया कि म्याँमार अब अन्तरराष्ट्रीय सुर्ख़ियों में नहीं छाया हुआ है, लेकिन लाखों लोगों की विपत्ति गहराती जा रही है.
“हम म्याँमार में निर्धनता के गर्त को देख रहे हैं, जिससे मानव विकास पर ही अपने आप चोट पहुँच रही है. यह एक ऐसा युद्ध है जिसमें किसी की जीत नहीं हो सकती. हर कोई हार रहा है.”
म्याँमार के कुछ इलाक़ों में संघर्ष, विस्थापन, और सेवाओं की उपलब्धता में कठिनाई की वजह से निर्धनता उपज रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में आजीविका, शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक सेवाओं में व्याप्त पिछड़ापन ज़िम्मेदार है.
पश्चिमी म्याँमार में राख़ीन प्रान्त, बहुआयामी निर्धनता से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र में है, जहाँ दो-तिहाई से अधिक लोग निर्धन हैं और एक-तिहाई गम्भीर निर्धनता से जूझ रहे हैं.
रोहिंग्या समेत अन्य राष्ट्रीविहीन और विस्थापित आबादी की वंचना को पूरी तरह से आंक पाना कठिन है, चूँकि फ़ोन के ज़रिए जानकारी जुटाने के सीमित विकल्प हैं.
रिपोर्ट ने उन धारणाओं को भी चुनौती दी है, जिनके अनुसार निर्धनता मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में है. हिंसक टकराव से प्रभावित अनेक इलाक़ों की तुलना में यंगून क्षेत्र में निर्धनता की दर सबसे कम है, लेकिन यहाँ बहुआयामी निर्धनता से पीड़ित लोगों की एक बड़ी आबादी बसी हुई है.
यह विश्लेषण एक ऐसे समय जारी किया गया है जब म्याँमार में हर पाँच में से लगभग एक घर-परिवार, बाढ़, चक्रवाती तूफ़ान, सूखे, भूस्खलन समेत अन्य जलवायु जनित जोखिमों का सामना कर रहा है.
इस वर्ष अगस्त महीने के अन्त तक, बाढ़ की वजह से छह लाख लोग प्रभावित हुए हैं. इसके साथ ही, खाड़ी क्षेत्र में संकट की वजह से ईंधन की क़ीमतों में उछाल आया है जिससे खाने पीने का सामान महंगा हुआ है.
हिंसक टकराव, असुरक्षा, आर्थिक व सामाजिक दबाव के साए में बड़े हो रहे युवाओं के लिए यह एक कठिन समय है. उनके लिए अवसर सिकुड़ रहे हैं और शिक्षा, रोज़गार, आगे बढ़ने के लिए उनके पास सीमित विकल्प हैं. 2021 के बाद से अब तक, म्याँमार में कम से कम 10 लाख युवाओं के देश छोड़कर जाने का अनुमान है.